ताइवान/धर्मशाला, एजेंसी। तिब्‍बत के आध्‍यातिक नेता दलाई लामा ने अपने 85वें जन्‍मदिन पर ताइवान में यहां की नागरिकों से रूबरू हुए। रविवार को ताइवान में आयोजित 'आठ वर्सेज फॉर ट्रेनिंग द माइंड' के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्‍होंने ताइवान की जनता को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया।

पूर्वी लद्दाख के गलवन घाटी में चीनी सैनिकों की हिंसा और तनाव के बीच से 14वें तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा का 85वां जन्मदिन आज मनाया जाएगा और उनके अनुयायियों  में इस दिन को लेकर काफी खुशी है। दुनिया के सबसे सम्मानित आध्यात्मिक नेता सोमवार को 85 वर्ष के हो गए। दलाईलामा तेनजिन ग्यात्सो का 85वां जन्मदिन मनाने के लिए पूरा वर्ष कृतज्ञता के रूप में मनाया जाएगा। केंद्रीय तिब्बत प्रशासन भी उनका जन्मदिन मनाएगा। जुलाई से लेकर 30 जून, 2021 तक विश्वभर में वर्चुअल कार्यक्रम भी होंगे।

शांति पुरस्कार विजेता, दलाई लामा को 1959 में चीनी शासन के खिलाफ विद्रोह के बाद से खुद को भारत में निर्वासित कर दिया। 17 मार्च, 1959 को दलाईलामा को कई अनुयायियों के साथ देश छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा था। उस समय उनकी आयु 24 वर्ष की थी। दलाईलामा बेहद जोखिम भरे रास्तों को पार कर भारत पहुंचे थे। कुछ दिन उन्हें देहरादून में ठहराया गया था। उसके बाद धर्मशाला के मैक्लोडगंज में रहने की सुविधा दी गई है। यहां उनका पैलेस व बौद्ध मंदिर है। दलाई लामा को एकता और करुणा के संदेशों के लिए जाने जाते हैं। 

14वें  दलाई लामा का जन्म 6 जुलाई 1935 को हुआ था। चीन के खिलाफ आवाज उठाने लगे। भारत ने दलाई लामा को तब शरण दी थी, जब वह मात्र 23 वर्ष के थे। दलाई लामा को मुख्य रूप से शिक्षक के तौर पर देखा जाता है क्योंकि लामा का मतलब गुरु होता है। दलाई लामा अपने लोगों को सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देते हैं। 

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