जेनेवा, एजेंसी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के विशेषज्ञों की एक टीम ने सभी देशों से बुजुर्गो, गर्भवती महिलाओं, स्वास्थ्य कर्मियों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों को कोरोना रोधी वैक्सीन की दूसरी बूस्टर डोज देने पर विचार करने को कहा है, क्योंकि इन्हें गंभीर बीमारी होने का ज्यादा खतरा है। समाचाए एजेंसी आइएएनएस के मुताबिक,  कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए ज्यादातर देशों में अभी वैक्सीन की दो प्राथमिक डोज और उसके चार से छह महीने बाद एक बूस्टर डोज लगाई जा रही है। कुछ देशों में दूसरी बूस्टर डोज भी दी जा रही है। हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने अभी तक कोरोना रोधी वैक्सीन की दूसरी बूस्टर डोज देने की सिफारिश नहीं की थी।

कोरोना वायरस के कई नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं 

महामारी और टीकाकरण की मौजूदा हालात पर विचार करने के लिए पिछले हफ्ते डब्ल्यूएचओ के टीकाकरण पर विशेषज्ञों के रणनीतिक सलाहकार समूह (एसएजीई) की बैठक हुई थी। इसमें समूह ने चौथी या दूसरी बूस्टर डोज देने की सिफारिश की, लेकिन केवल कमजोर वर्ग के लोगों को। समूह ने एक बयान में कहा कि दूसरी बूस्टर डोज लगाने से कोरोना वायरस के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने के साक्ष्य मिल रहे हैं। मौजूदा टीकाकरण से जो प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही है वह कुछ समय बाद कमजोर पड़ने लगती है।

कोरोना वायरस के कई नए वैरिएंट भी समय-समय पर सामने आ रहे हैं। सबसे ज्यादा संक्रामक ओमिक्रोन वैरिएंट अभी भी प्रभावी बना हुआ है। ऐसे में जरूरी है कि कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को एक और बूस्टर डोज लगाकर सुरक्षित किया जाए। डब्ल्यूएचओ ने कोरोना की बूस्टर डोज के साथ ही मौसमी बुखार से संबंधित वैक्सीन लगाने की संभावना पर भी विचार करने को कहा है। 

जानें क्या है बूस्टर डोज

वैक्सीन की एक अतिरिक्त खुराक को ही बूस्टर डोज कहा जाता है। इसे एहतियाती खुराक भी कहा जाता है। इसे एहतियाती खुराक भी कहा जा रहा है। यह खुराक लोगों में कोरोना वायरस के खिलाफ बनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में असरकारक सिद्ध होती है।

Edited By: Piyush Kumar