नई दिल्ली, रॉयटर्स। कोरोना ने दुनिया भर में कई देशों में तमाम तरह के हालात बदल दिए हैं। आर्थिक नुकसान के साथ-साथ देश के बच्चों का भविष्य भी प्रभावित किया है। शहरी इलाकों में तो बच्चे ऑनलाइन किसी न किसी तरह से शिक्षा ले ले रहे हैं मगर ग्रामीण इलाकों में और दुनिया के कुछ देशों में शिक्षा पर भी ग्रहण लग गया है। कई देशों में आज भी इंटरनेट की सुविधा मौजूद नहीं है, वहां सिर्फ टीवी उपलब्ध है। ऐसे देशों में अब शिक्षा और मनोरंजन दोनों का माध्यम टीवी ही रह गया है।

दरअसल ये माना जाता है कि बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो वहां वो अपने टीचरों और साथियों से काफी कुछ सीखते हैं, उनकी नींव मजबूत होती है मगर इस शैक्षणिक सत्र में जब उनकी पढ़ाई शुरू होने वाली थी तो कोरोना संकट आ गया। मार्च के अंतिम सप्ताह में बंद हुए स्कूलों को अब तक खुलने की नौबत नहीं आ पाई है, फिलहाल तीन महीने तक इनके खुलने के आसार भी नहीं नजर आ रहे हैं। ऐसी जगहों पर बच्चों के भविष्य पर काफी असर पड़ रहा है। ऐसा ही एक देश है अफ्रीका जहां इन दिनों बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन दोनों का साधन टीवी ही बना हुआ है।

अफ्रीकी देश केन्या की राजधानी नैरोबी में बच्चे अपने माता-पिता के बीच बैठकर टीवी पर कार्टून कैरेक्टर देखकर मछली (फिश) का उच्चारण सीख रहे हैं। यहां शिक्षकों और सहपाठियों की जगह टेलीविजन ने ले ली है। सरकार ने कोरोना वायरस के संक्रमण को काबू में रखने के लिए मार्च में ही स्कूलों को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया था। यहां के स्कूलों को फिलहाल जनवरी तक बंद कर दिया गया है।

नहीं है ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प 

यहां बच्चों के पास ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प नहीं है। यूएन की एजेंसी यूनिसेफ का कहना है कि उप-सहारा अफ्रीका के देश के कम से कम आधे स्कूली छात्रों के पास इंटरनेट नहीं है। यहां लाखों बच्चे टीवी पर कार्टून देख पढ़ना सीख रहे हैं। तंजानिया का एक एनजीओ (गैर-लाभकारी संगठन) उबोंगो अफ्रीकी देशों के टीवी और रेडियो नेटवर्क को नि:शुल्क सामग्री देता है।

मार्च महीने में उबोंगो ने 9 देशों में कार्यक्रम का प्रसारण किया। यह कार्यक्रम 1.2 करोड़ घरों तक पहुंचा। उबोंगा का स्वाहिली में मतलब होता है "दिमाग"। उबोंगो के संचार प्रमुख ईमान लिपुंबा कहते हैं कि अगस्त के महीने तक कार्यक्रम 20 देशों के 1.7 करोड़ घरों तक पहुंच चुका है, लिपुंबा कहते हैं कि कोविड-19 महामारी ने हमें तेजी से बढ़ने के लिए मजबूर किया है।

साल 2014 में कलाकारों, इनोवेटर्स और शिक्षकों ने तंजानिया में उबोंगो की स्थापना की थी। इसको अभी तक 40 लाख अमेरिकी डॉलर की मदद मिल चुकी है और इसने यूट्यूब से सात लाख अमेरिकी डॉलर भी कमाए हैं। मुनेन की तरह अन्य बच्चों के लिए फिलहाल उबोंगो के कार्यक्रम ही सीखने का जरिया हैं। केन्या के शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि कोविड-19 के मामले जब काफी हद तक कम हो जाएंगे तभी स्कूल दोबारा खोले जा सकते हैं।  

Posted By: Vinay Tiwari

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