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धरती की गर्माहट से समुद्री लहरें हुईं बेकाबू, ज्वार-भाटे की बदली ऊंचाई और तीव्रता; अंटार्कटिका की बर्फ पर भी पड़ेगा असर

Published: Fri, 25 Sep 2026 09:37 PM (IST)

ग्लोबल वार्मिंग के कारण समुद्र का तापमान और जलस्तर बढ़ने से ज्वार-भाटे की संरचना बदल रही है, जिससे कुछ क्षेत्रों ...और पढ़ें

धरती की गर्माहट से समुद्री ज्वार-भाटे में बदलाव

धरती की गर्माहट से समुद्री ज्वार-भाटे में बदलाव

HighLights

  1. ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र का तापमान और जलस्तर बढ़ रहा है।

  2. ज्वार-भाटे की ऊंचाई और तीव्रता में बदलाव आ रहा है।

  3. तटीय इलाकों में बाढ़ और कटाव का खतरा बढ़ सकता है।

डिजिटल डेस्क, मेलबर्न। ग्लोबल वार्मिंग से समुद्र का तापमान और जलस्तर बढ़ने के साथ उसकी परतों की संरचना बदल रही है, जिससे कुछ क्षेत्रों में ज्वार-भाटे की ऊंचाई और तीव्रता बदल रही है और तटीय इलाकों पर बाढ़ व कटाव का खतरा बढ़ सकता है।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ज्वार-भाटे का स्वरूप एक जैसा नहीं है। कहीं समुद्र का जलस्तर ज्वार के साथ बहुत कम ऊपर-नीचे होता है, तो कहीं ऊंचे और नीचे ज्वार के बीच बड़ा अंतर देखने को मिलता है।

पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के किम्बरली तट पर यह अंतर दस मीटर से भी अधिक हो सकता है, जो करीब तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर है।

ज्वार-भाटा तटरेखाओं और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देने के साथ तटीय समुदायों को भी प्रभावित करता है। इसका असर अंटार्कटिका की बर्फीली परतों के पिघलने तक पर पड़ सकता है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन के कारण महासागरों में हो रहे बदलावों के बीच यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि बदलती समुद्री परिस्थितियां ज्वार-भाटे के स्वरूप को किस तरह प्रभावित कर रही हैं।

चंद्रमा का सबसे बड़ा प्रभाव

समुद्री ज्वार-भाटे के लिए मुख्य रूप से चंद्रमा और सूर्य का गुरुत्वाकर्षण जिम्मेदार है। सूर्य आकार में चंद्रमा से बहुत बड़ा है, लेकिन पृथ्वी से चंद्रमा की कम दूरी के कारण उसका गुरुत्वाकर्षण प्रभाव ज्वार-भाटे पर अधिक पड़ता है। दूरी बढ़ने के साथ गुरुत्वाकर्षण बल कम होता जाता है।

जब पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य एक सीध में आते हैं, तो दोनों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव मिलकर ज्वार-भाटे की तीव्रता बढ़ा देते हैं।

1687 में ब्रिटिश विज्ञानी आइजक न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण बल के आधार पर ज्वार-भाटे की व्याख्या की थी। इसके बाद विज्ञानियों ने इसे समझने के लिए कई नए सिद्धांत और मॉडल विकसित किए।

गर्म होते महासागर से नई चुनौती

जलवायु परिवर्तन के कारण समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और ऊपरी महासागर का तापमान भी बढ़ रहा है। समुद्र की अलग-अलग परतों में बढ़ता अंतर ज्वार-भाटे के स्वरूप को प्रभावित कर सकता है।

विज्ञानियों के माप से पहले ही संकेत मिल रहे हैं कि कुछ क्षेत्रों में ज्वार-भाटा बदल रहा है।

महासागर की परतों में हो रहे बदलाव इन परिवर्तनों को समझने में मदद कर सकते हैं। साथ ही, बेहतर महासागरीय मॉडल अब समुद्र के भीतर बनने वाले ज्वार-भाटे को अधिक विस्तार से दर्शा रहे हैं।

नए उपग्रह उन जटिल तटीय क्षेत्रों में भी ज्वार-भाटे को मापने में मदद कर रहे हैं, जिन्हें पहले अंतरिक्ष से देखना कठिन था।