काठमांडू, एएनआइ। नेपाल में इनदिनों सियासी हलचल काफी तेज है। नेपाल के पीएम केपी ओली अपनी सरकार बनाने की जुगत में लगे हैं। भारत के खिलाफ बयानबाजी के कारण ओली अपनी ही पार्टी, नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी(एनसीपी) में बुरी तरह घिर चुके हैं। उनकी पार्टी के नेता उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर पार्टी कमिटी की कई बार बैठकें आयोजित हुई हैं। फिलहाल, शुक्रवार को एक बार फिर नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी की बैठक को एक सप्ताह के लिए टाल दिया गया। लेकिन इस बीच नेपाल के राजनीतिक हालात में चीन का दखल साफ देखा जा रहा है। चीन के राजदूत लगातार नेपाल की सरकार और पार्टी नेताओं के बीच सुलह के लिए बैठकें कर रहे हैं। इसको लेकर नेपाल में विरोध है लेकिन केपी ओली भारत के खिलाफ सख्त और चीन के प्रति नरम दिख रहे हैं।

इस बीच एक रिपोर्ट में इस बात का दावा किया जा रहा है चीन की नेपाल को लेकर एक खास नीति है, जिसके तहत वह चाल चल रहा है। वैश्विक अनुभव विश्लेषण की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, आर्थिक रूप से कमजोर देशों के भ्रष्ट नेताओं का इस्तेमाल कर उस देश में घुसपैठ करता है और नेपाल बस एक ऐसा ही मामला है। 

केपी ओली पर भ्रष्ट्राचार के आरोप

इस रिपोर्ट के लेखक रोलांड जैक्वार्ड बताते हैं कि यह नीति चीनी कंपनियों को न केवल उस देश में अपने व्यावसायिक हितों को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाता है, बल्कि चीन को उस देश की राजनीति में दखल देने का मौका भी दिलाती है।  रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की निजी संपत्ति में पिछले कुछ सालों में वृद्धि हुई है, जिसे उन्होंने नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता के रूप में कथित रूप से विदेशों में जमा कर रखा है। 

जैक्वार्ड लिखते हैं यह विश्वसनीय रूप से पता चला है कि पीएम केपी ओली का Mirabaud बैंक की जेनेवा शाखा में एक खाता है, जो बुलेवार्ड जॉर्जेस-फेवॉन में एक नॉनसेप्ट बिल्डिंग में स्थित है। उन्होंने आगे बताया कि खाते में मौजूद 5.5 लाख डॉलर के शेयर्स, ओली और उनकी पत्नी राधिका शाक्य को हर साल 50 करोड़ डॉलर देते हैं।

Posted By: Shashank Pandey

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