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बांग्लादेश व चीन का नया बंदरगाह समझौता, भारत की सीमा के पास बढ़ा ड्रैगन का प्रभाव

Published: Mon, 12 Oct 2026 11:58 PM (IST)

बांग्लादेश ने चीन के साथ 33.57 करोड़ डॉलर के रियायती ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसका उद्देश्य भारत की ...और पढ़ें

बांग्लादेश व चीन का नया बंदरगाह समझौता।

बांग्लादेश व चीन का नया बंदरगाह समझौता।

HighLights

  1. बांग्लादेश ने चीन से मोंगला पोर्ट विस्तार हेतु ऋण लिया।

  2. भारत सीमा से 80 किमी दूर मोंगला पोर्ट का आधुनिकीकरण।

  3. समझौता क्षेत्र में चीन का प्रभाव बढ़ा, भारत की चिंता बढ़ी।

डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने देश के रणनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को नया मोड़ देते हुए चीन के साथ 33.57 करोड़ डॉलर (लगभग 2,404 मिलियन युआन या 3,592.89 करोड़ टका) के एक बड़े रियायती ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत की सीमा से मात्र 80 किलोमीटर पश्चिम में स्थित बांग्लादेश के दूसरे सबसे बड़े समुद्री बंदरगाह - मोंगला पोर्ट - का विस्तार और आधुनिकीकरण करना है। यह समझौता केवल बुनियादी ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि दक्षिण एशियाई कूटनीति के विशाल शतरंज पर एक अहम चाल है।

पशुर नदी के पूर्वी तट पर बसा यह बंदरगाह बंगाल की खाड़ी से 71 समुद्री मील की दूरी पर स्थित है। इस परियोजना के तहत दो आधुनिक कंटेनर टर्मिनल और समर्पित कार्गो-हैंडलिंग यार्ड का निर्माण किया जाएगा, जिससे बंदरगाह की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।

आर्थिक शर्तें व बीजिंग से गहराता समझौता

चीन का 'एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक ऑफ चीन' बांग्लादेश के अर्थ मामलों के विभाग के माध्यम से यह ऋण प्रदान कर रहा है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह ऋण बेहद सुलभ शर्तों पर दिया गया है - मात्र दो प्रतिशत की रियायती ब्याज दर, 20 साल की पुनर्भुगतान अवधि और पांच साल की शुरुआती छूट (ग्रेस पीरियड)। यह वित्तीय समझौता प्रधानमंत्री तारिक रहमान की जून में हुई बीजिंग यात्रा के दौरान बांग्लादेश और चीन के बीच बनी सहमति का सीधा परिणाम है।

रणनीतिक समीकरणों का नया मोड़

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मोहम्मद युनूस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने मोंगला पोर्ट के निकट 110 एकड़ भूमि पर बनने वाले विशेष 'भारतीय आर्थिक क्षेत्र' को रद कर दिया था। वर्ष 2015 के द्विपक्षीय समझौते के तहत चिह्नित इस जमीन पर निर्माण कार्य में देरी को आधार बनाकर यह कदम उठाया गया।

भारत की सीमा के इतने करीब चीन के बढ़ते कदमों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर उसकी बढ़ती पकड़ ने नई दिल्ली की सामरिक चिंताओं को गहरा कर दिया है। सीमांत क्षेत्र में ड्रैगन की यह सक्रियता क्षेत्रीय संतुलन और सुरक्षा दृष्टि से एक संवेदनशील मोड़ प्रस्तुत करती है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)