ये है साइबर ठगी का महाअड्डा, दुनियाभर से बंधक बनाकर लाए जाते थे लोग; इनकार करने पर दी जाती थी यातनाएं
कंबोडिया में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां नोम पेन्ह और सिहानुकविले में चल रहे अरबों डॉलर के स्कैम कंपाउंड्स को खाली कराया गया है।

कंबोडिया में ऑनलाइन ठगी नेटवर्क का महा अड्डा (फोटो-सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, नोम पेन्ह। कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह और तटीय शहर सिहानुकविले से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के सबसे बड़े और खौफनाक नेटवर्क की तस्वीरें पहली बार दुनिया के सामने आई हैं।
कंबोडियाई सरकार द्वारा चलाए गए एक बड़े विशेष अभियान के बाद साइबर ठगी के उन अभेद्य स्कैम कंपाउंड्स को खाली करा लिया गया है, जहां से कई देशों के लाखों लोगों को चूना लगाया जा रहा था।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, कंबोडिया में चल रही यह स्कैम इकोनॉमी अरबों डॉलर की है, जो वहां की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन चुकी थी।
कंबोडियाई अधिकारियों के अनुसार, पिछले एक साल के भीतर 86 से ज्यादा बड़े कंपाउंड और कुल 663 से अधिक ठगी के ठिकानों पर ताले लटकाए गए हैं। केवल राजधानी नोम पेन्ह में ही 66 से ज्यादा बड़ी फ्रॉड साइट्स बंद कराई गई हैं। इस दौरान करीब 30,000 संदिग्धों को पकड़ा गया है।

होटल और कसीनो की आड़ में अवैध दफ्तर
सामने आई तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि ये ठिकाने किसी सामान्य कॉर्पोरेट दफ्तर जैसे नहीं होते। ये 31 से लेकर 55 मंजिलों तक की ऊंची सफेद इमारतें होती हैं, जिन्हें चारों तरफ से कटीले तारों और ऊंची दीवारों से घेरा जाता है।
इन इमारतों के भीतर कसीनो, होटल, हॉस्टल और सैकड़ों कंप्यूटरों व स्क्रीन्स से लैस कॉल सेंटर बनाए गए थे।
छापेमारी के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को फर्जी पुलिस स्टेशन, नकली बैंक सेटअप, हजारों की संख्या में मोबाइल फोन, हाई-टेक कंप्यूटर और अलग-अलग देशों के फर्जी सिम कार्ड मिले हैं।

कैसे फंसाए जाते हैं भारतीय युवा?
भारत सरकार द्वारा संसद और विदेश मंत्रालय में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कंबोडिया, म्यांमार और लाओस जैसे देशों से अब तक 6,998 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया गया है। इनमें से अकेले कंबोडिया से 2,533 भारतीयों को सकुशल वापस लाया गया है।
यह गिरोह टेलीग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए डेटा एंट्री ऑपरेटर या आईटी सपोर्ट की नौकरियों के विज्ञापन दिए जाते हैं, जिनमें 1,000 से 1,500 डॉलर (लगभग 80,000 से 1,20,000 रुपये) प्रति माह वेतन का झांसा दिया जाता है।

युवाओं को टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया बुलाया जाता है। जैसे ही वे नोम पेन्ह हवाई अड्डे पर उतरते हैं, गिरोह के लोग उनका पासपोर्ट, वीजा और पर्सनल मोबाइल फोन छीन लेते हैं और उन्हें सीधे सुरक्षा घेरे वाले स्कैम कंपाउंड्स में कैद कर देते हैं।

इनकार करने पर देते थे यातनाएं
यदि कोई अवैध काम करने से इनकार करता या घर जाने की मांग करता, तो उसे अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। उन्हें खाना-पानी देना बंद कर दिया जाता, अंधेरे कमरों में बंद कर इलेक्ट्रिक शॉक दिए जाते थे।
कई मामलों में उनके भारत से पहुंचने युवाओं के परिजनों से 3 से 5 लाख रुपये तक की फिरौती मांगी जाती थी। टारगेट पूरा न करने वाले युवाओं को दूसरे कसीनो-कंपाउंड्स में बेच दिया जाता था।
