सोफिया, बुल्‍गारिया (रायटर्स)। Bulgaria-Russia Tension: कभी रूस के करीबी रहे बुलगारिया ने अब उससे मुंह मोड़ लिया है। बुल्‍गारिया के निवर्तमान प्रधान मंत्री किरिल पेटकोव ने रूस के उस अल्‍टीमेटम को मानने से साफ इन्‍कार कर दिया है जिसमें रूस ने बुल्‍गारिया द्वारा 70 रूसी राजनयिकों को शुक्रवार दोपहर तक देश छोड़ने के फैसले को वापस लेने को कहा था। इसके अलावा उन्‍होंने बुल्‍गारिया के वित्‍तमंत्री और पीपी पार्टी के नेता असेन वासिलेव को अपनी जगह जगह देश का नया प्रमुख बनाने का भी आदेश दिया था।

आपको बता दें कि बाल्‍कन देश बुल्‍गारिया यूरोपीय संघ का सदस्‍य देश होने के अलावा नाटो का सदस्‍य भी है। कभी इसको रूस के करीबी देशों में गिना जाता था। हाल के दिनों में इस देश में राजनीतिक संकट छाया हुआ है। ये संकट पिछले सप्‍ताह देश की सरकार के खिलाफ सदन में लाए अविश्‍वास प्रस्‍ताव को लेकर खड़ा हुआ था। इसके बाद पेटकोव ने इसी सप्‍ताह 70 रूसी राजनयिकों पर जासूसी करने का आरोप लगाकर उनको देश से बाहर जाने का आदेश दे डाला था। इसके जवाब में रूस ने गुरुवार को बुल्‍गारिया को अपना फैसला पलटने के लिए अल्‍टीमेटम दिया था, जिसमें शुक्रवार तक की समय सीमा दी गई थी। इसमें कहा गया था कि यदि बुल्‍गारिया अपना ये फैसला नहीं बदलता है तो रूस मास्‍को स्थित उसके दूतावास को बंद कर देगा।

रूस के इस फैसले और धमकी का यूरोपीय संघ ने कड़ा विरोध करते हुए गैर सिद्धांतिक और गलत करार दिया है। एक वीडियो संदेश में पेटकोव ने रूस के इस फैसले को न माने जाने वाला बताया है। उन्‍होंने कहा है कि हम बुल्‍गारिया को फैसला पलटने के लिए मंजूरी नहीं देंगे। इसके अलावा रूस स्थित बुल्‍गारिया दूतावास कर्मियों को भी दिए अल्‍टीमेटम पर नाराजगी जताई गई है। पेटकोव इस सरकार को समर्थन देंगे। वहीं रूस के समर्थक माने जानी वाले सोशलिस्‍ट नेताओं ने पेटकोव के इस फैसले का विरोध करते हुए सरकार से दूर रहने का फैसला लिया है। इन नेताओं का कहना है कि वो नई सरकार में कोई भूमिका अदा नहीं कर सकते हैं। बता दें कि बुल्‍गारिया के रूसी राजनयिकों को बाहर करने के फैसले ने देश में नई समस्‍या को जन्‍म दे दिया है। बता दें कि सोशलिस्‍ट नेताओं को रूस का बड़ा समर्थक माना जाता है।

शुक्रवार से पूर्व इन नेताओं ने बुल्‍गारिया से रूसी राजनयिकों को बाहर करने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद उन्‍होंने संसद में इसको लेकर वोटिंग करवाने की भी मांग की थी, जिससे इस फैसले को पलटा जा सके। वहीं पेटकोव को इस बात की उम्‍मीद है कि वो सत्‍ता में वापस आ जाएंगे जिससे देश में दोबारा चुनाव करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं दूसरी तरफ सोशिलिस्‍ट नेताओं ने बीच का रास्‍ता तलाश करने पर भी जोर दिया हे। रूस ने नई सरकार के गठन को लेकर जो प्रपोजल दिया है उसकी समय सीमा सात दिन रखी गई है। इस दौरान नई सरकार और इसमें शामिल मंत्रियों के नाम राष्‍ट्रपति को भेजने होंगे। इसके अलावा नई सरकार को अपना बहुमत भी साबित करना होगा।

 

Edited By: Kamal Verma