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    बेल्जियम का रूसी संपत्ति बेचकर यूक्रेन की मदद से इन्कार

    Updated: Wed, 03 Dec 2025 11:30 PM (IST)

    बेल्जियम ने रूसी संपत्ति बेचकर यूक्रेन की मदद करने से मना कर दिया है। सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रतिबंधों के कारण ऐसा करना संभव नहीं ...और पढ़ें

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    बेल्जियम ने जब्त की गई रूसी संपत्ति। (रॉयटर्स)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बेल्जियम ने जब्त की गई रूसी संपत्ति को बेचकर यूक्रेन की सैन्य और आर्थिक मदद करने की यूरोपीय यूनियन (ईयू) की योजना को अस्वीकार कर दिया है। कहा है कि यह योजना उसके लिए खतरनाक है। यूरोप में रूस की सबसे ज्यादा 226 अरब डॉलर की संपत्ति बेल्जियम में है। इसी के चलते यूरोपीय देश उस पर जब्त रूसी संपत्ति को बेचने का दबाव डाल रहे हैं।

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    यूक्रेन युद्ध के चलते अमेरिका और यूरोपीय देशों ने 2022 में रूस और उसके नागरिकों की संपत्तियों को जब्त किया था। युद्ध लड़ रहे यूक्रेन को अपने सैन्य और सामान्य खर्चों के लिए 2026 और 2027 में करीब 150 अरब डॉलर की जरूरत होगी। यूरोपीय यूनियन ने इस जरूरत को पूरा करने का यूक्रेन को भरोसा दिया है। ईयू ने 2022 में युद्ध शुरू होने से लेकर अभी तक यूक्रेन को 197 अरब डॉलर की सहायता दी है।

    यह सहायता हथियारों, जरूरी सामान और नकद धनराशि के रूप में दी गई है। लेकिन युद्ध लंबा खिंचने और यूक्रेन में हुई बर्बादी की भरपाई के लिए अब बड़ी सहायता की जरूरत होगी। बड़ी सहायता के लिए आवश्यक धनराशि को रूस की जब्त संपत्ति बेचकर एकत्रित करने का ईयू ने निर्णय लिया है और इसके लिए सबसे ज्यादा रूसी जब्त संपत्ति वाले बेल्जियम पर जिम्मेदारी डाली गई है।

    ईयू की कार्यकारी शाखा यूरोपीय आयोग ने बुधवार को बैठक के बाद बताया कि यूक्रेन की जरूरतों को आसान शर्तों पर कर्ज देकर पूरा किया जाएगा। लेकिन इसके कुछ घंटे बाद बेल्जियम ने साफ कर दिया कि वह इस पहल में सहयोग नहीं देगा।

    बेल्जियम के विदेश मंत्री मैक्जिम प्रिवट ने कहा, रूसी संपत्ति बेचकर यूक्रेन को दिए जाने वाले कर्ज की योजना खतरनाक है। इस तरह की योजना पर पहले कभी कार्य नहीं हुआ है, इसलिए उसके साथ जाना बेल्जियम के लिए संभव नहीं होगा। इससे पहले बेल्जियम ने यूरोप के शक्तिशाली देशों-फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी से रूसी हमले की स्थिति में बचाव के लिए सुरक्षा गारंटी मांगी थी।

    उधर, रूस ने साफ कर दिया है कि उसकी संपत्ति को बेचना चोरी जैसा कृत्य होगा और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा। ऐसा करने वाले देश को भयंकर दुष्परिणाम भुगतने होंगे।

    (समाचार एजेंसी एपी के इनपुट के साथ)