कहां हैं मुमताज? भारत से वापस भेजी गई असम की महिला की तलाश कर रहा बांग्लादेश
भारत से बांग्लादेश डिपोर्ट की गई असम की मुमताज बेगम लापता हैं, जिसकी तलाश बांग्लादेशी अधिकारी कर रहे हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एआई द्वारा निर्मित फोटो।)
HighLights
मुमताज बेगम 14 जून को भारत से डिपोर्ट होने के बाद लापता।
बांग्लादेशी अधिकारी और सिविल सोसाइटी मुमताज की तलाश में जुटे।
गुवाहाटी हाई कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर सवाल उठाए, मुआवजे का आदेश।
डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश असम की रहने वाली 43 साल की मुमताज बेगम की तेजी से तलाश कर रहा है। वह 14 जून को भारत से डिपोर्ट किए जाने के बाद से लापता है। ढाका में वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी कहा कि वे इस मामले पर भारत से आधिकारिक सूचना का इंतजार कर रहे हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (राजनीतिक और आव्रजन) डॉ. जियाउद्दीन अहमद ने कहा कि अधिकारी मुमताज का पता लगाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन रविवार तक उनके पास कोई जानकारी नहीं मिली।
पहचान के लिए अखबारों में छापी गई फोटो
स्थानीय पुलिस और सिविल सोसाइटी के सदस्यों वाली सर्च टीमें सिलहट और आस-पास के इलाकों पर ध्यान दे रही हैं, लेकिन अब तक उसका कोई सुराग नहीं मिला है। तलाश में मदद के लिए 22 सितंबर को प्रमुख बंगाली अखबारों में उनकी फोटो और पहचान की जानकारी के साथ एक अपील छापी गई थी।
27 सितंबर की देर रात यह मामला पुलिस और दूसरे विभागों को भेजा गया। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 3 सितंबर को विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिया कि वे बांग्लादेश में मुमताज का पता लगाने और उसे वापस लाने की कोशिश करें।
'परिवार को सूचना दिए बिना ही किया गया डिपोर्ट'
हाई कोर्ट ने असम सरकार को उसके पति मुजम्मेल हक को 2 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि उसे उसके पति या परिवार के किसी वयस्क सदस्य को सूचित किए बिना ही निकाल दिया गया था।
क्या है मामला?
ट्रिब्यूनल ने असम की एक महिला को विदेशी घोषित कर दिया था लेकिन गुवाहाटी हाई कोर्ट ने इस फैसले को रद कर दिया। बेंच ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय जमीन पर मौजूद हर व्यक्ति को बुनियादी मानवाधिकार मिलते हैं।
कोर्ट ने असम पुलिस और गृह विभाग को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि विदेशी घोषित किए गए लोगों को ट्रिब्यूनल के आदेशों के बारे में बताया जाए और उनके जिले से बाहर ले जाने से पहले उनके बालिग परिवार के सदस्यों को सूचित किया जाए।
कोर्ट ने ट्रिब्यूनल की आलोचना की कि उसने उससे गुवाहाटी हाई कोर्ट में फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की राय को चुनौती देने का मौका छीन लिया। नागांव की मुमताज को फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था।
कोर्ट ने पाया कि सबूतों के मूल्यांकन में कमियां थीं, जिनमें उनके दादा के 1965 और 1970 के वोटर-लिस्ट रिकॉर्ड, उनके पिता का 1977 का वोटर-लिस्ट रिकॉर्ड और वोटर आईडी, गांव-बूढ़ा और ग्राम पंचायत के सर्टिफिकेट, स्कूल ट्रांसफर सर्टिफिकेट और जमीन के कागजात शामिल थे। वह 30 मई को अपने वकील के साथ ट्रिब्यूनल के सामने पेश हुईं, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
उन्हें जुरिया और नागांव सदर पुलिस स्टेशनों, गोलपारा में मटिया होल्डिंग सेंटर और फिर श्रीभूमि में एरालीगूल होल्डिंग सेंटर (4-13 जून) ले जाया गया। बीएसएफ ने हाई कोर्ट को बताया कि 13 जून को उन्हें बीएसएफ को सौंपा गया और 14 जून को कछार के कलाइनचेरा से बांग्लादेश भेज दिया गया। तीन महीने बाद भी पुलिस, अधिकारी और सिविल सोसाइटी के सदस्य यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह कहां हैं।
