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भारत पर कम टैरिफ से घबराया बांग्लादेश, अब ट्रंप के साथ यूनुस करने जा रहे 'सीक्रेट' डील

Published: Fri, 06 Feb 2026 08:23 AM (IST)Updated: Fri, 06 Feb 2026 09:30 AM (IST)

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद बांग्लादेश अमेरिका के साथ 9 फरवरी को एक गुप्त व्यापार समझौता करने जा रहा है। ...और पढ़ें

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद बांग्लादेश घबरा गया है। ताजा घटनाक्रम में अमेरिका और बांग्लादेश 9 फरवरी को एक ट्रेड एग्रीमेंट साइन करने वाले हैं। इस डील की शर्तों को लेकर गोपनीयता के कारण इसकी काफी आलोचना हो रही है।

बड़ी बात यह है कि बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने वाले हैं और इससे पहले इस सीक्रेट डील की चर्चा हो रही है। भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट के बाद बांग्लादेश ने डील को फाइनल करने की जल्दी की है। ट्रंप ने भारतीय सामान पर टैरिफ घटाकर 18 परसेंट कर दिया गया है।

बांग्लादेश को सता रहा इस बात का डर

बांग्लादेश को डर है कि अगर वह उतने ही कॉम्पिटिटिव या बेहतर शर्तें हासिल नहीं कर पाता है तो वह भारत से मार्केट शेयर खो देगा। उसकी इकॉनमी बहुत ज्यादा अमेरिका को रेडीमेड गारमेंट (RMG) एक्सपोर्ट पर निर्भर करती है। यह उसके अमेरिकी एक्सपोर्ट का लगभग 90 परसेंट है।

बांग्लादेश पर टैरिफ

यह डील अप्रैल 2025 में वाशिंगटन द्वारा ढाका पर 37 प्रतिशत का भारी टैरिफ लगाने के बाद हुई है। जुलाई में टैरिफ पर बातचीत करके इसे 35 प्रतिशत और फिर अगस्त में आखिरकार 20 प्रतिशत कर दिया गया। आने वाले ट्रेड डील से टैरिफ को और कम करके 15 प्रतिशत किए जाने की उम्मीद है।

इसके अलावा, 2025 के बीच में मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक औपचारिक नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर साइन किए, जिसमें सभी टैरिफ और व्यापार बातचीत को गोपनीय रखने का वादा किया गया था। इस एग्रीमेंट का कोई भी ड्राफ्ट न तो जनता, न संसद और न ही प्रमुख इंडस्ट्री स्टेकहोल्डर्स के साथ शेयर किया गया है।

डील में अमेरिकी शर्तें

इस डील में कई 'शर्तें' हैं। पहली, चीन से इंपोर्ट कम करना और चीन के बजाय अमेरिका से मिलिट्री इंपोर्ट बढ़ाना। दूसरी, अमेरिकी इंपोर्ट बांग्लादेश में बिना किसी रोक-टोक के आ सकें और दक्षिण एशियाई देश को बिना कोई सवाल उठाए अमेरिकी स्टैंडर्ड और सर्टिफिकेशन को मानना होगा।

अमेरिका की गाड़ियों और पार्ट्स के इंपोर्ट के संबंध में कोई इंस्पेक्शन नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वॉशिंगटन चाहता है कि उसकी गाड़ियों को बांग्लादेश के बाजार में आसानी से एंट्री मिले।

प्राइवेट रिसर्च ऑर्गनाइजेशन सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के एक जाने-माने फेलो देवप्रिया भट्टाचार्य ने प्रोथोम आलो को बताया कि यह ट्रेड डील पारदर्शी नहीं है, क्योंकि इसके फायदे और नुकसान पर विचार करने का कोई मौका नहीं मिला है।

चूंकि, एक गैर-चुनी हुई अंतरिम सरकार चुनावों से तीन दिन पहले यह डील साइन कर रही है, इसका मतलब है कि समझौते को लागू करने की जिम्मेदारी उस पार्टी पर आएगी जो नई चुनी हुई सरकार बनाएगी।

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