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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 28, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

बांग्लादेश में अब कट्टरपंथियों को खुली छूट! हसीना के जाते ही जमात-ए-इस्लामी पर लगा बैन हटा

Published: Wed, 28 Aug 2024 03:59 PM (IST)

बांग्लादेश की यूनुस सरकार ने देश की मुख्य इस्लामिक पार्टी और उसके समूहों पर से प्रतिबंध हटा दिया और कहा ...और पढ़ें

बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पर लगा बैन हटा (फोटो-जागरण)
बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी पर लगा बैन हटा (फोटो-जागरण)

HighLights

  1. शेख हसीना की सरकार ने जमात-ए-इस्लामी पर लगाया था बैन
  2. 'आतंकवादी गतिविधियों' में उनकी संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला'

 रॉयटर्स, ढाका। बांग्लादेश की कार्यवाहक सरकार ने देश की मुख्य इस्लामिक पार्टी और उसके समूहों पर से प्रतिबंध हटा दिया और कहा कि उसे 'आतंकवादी गतिविधियों' में उनकी संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है।

पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना की सरकार ने आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जमात-ए-इस्लामी पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसमें छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान घातक हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया था, जो हसीना के खिलाफ विद्रोह में बदल गया, जिससे उन्हें इस्तीफा देने और भारत भागने के लिए मजबूर होना पड़ा।

'आतंकवादी गतिविधियों में नहीं है शामिल'

हसीना के प्रशासन की जगह लेने वाली कार्यवाहक सरकार द्वारा बुधवार को एक गजट अधिसूचना में कहा गया कि "आतंकवादी गतिविधियों में जमात और उसके सहयोगियों की संलिप्तता का कोई विशेष सबूत नहीं है।''

पार्टी ने इन आरोपों से इनकार किया है कि उसने हिंसा भड़काई और प्रतिबंध को "अवैध, न्यायेतर और असंवैधानिक" बताया। जमात बांग्लादेश में चुनाव नहीं लड़ सकी है क्योंकि 2013 में एक अदालत ने कहा था कि एक राजनीतिक दल के रूप में उसका पंजीकरण बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के साथ विरोधाभासी है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर करेंगे याचिका 

पार्टी के वकील शिशिर मोनिर ने कहा कि वह अपने पंजीकरण की बहाली के लिए अगले सप्ताह की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करेगी।

बता दें कि जमात एक इस्लामवादी और पाकिस्तान समर्थक संगठन माना जाता है। जमात का हिंदुओं के खिलाफ हिंसा का भी एक लंबा इतिहास रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमात के लोगों ने 2001 में भी अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की थी, जब बीएनपी-जमात गठबंधन ने बांग्लादेशी चुनाव जीता था।

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