भारत-बांग्लादेश समझौते रद नहीं होंगे, दोनों देशों के लिए लाभकारी बनाना लक्ष्य
बांग्लादेश के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने स्पष्ट किया है कि पिछली अवामी लीग सरकार में भारत के साथ ...और पढ़ें

भारत-बांग्लादेश समझौते रद नहीं होंगे। (रॉयटर्स)
HighLights
भारत-बांग्लादेश के 101 समझौते रद्द करने की कोई योजना नहीं।
समझौतों की समीक्षा का लक्ष्य उन्हें 'विन-विन' बनाना है।
बांग्लादेश राष्ट्रीय हितों के विपरीत प्रावधानों पर भारत से बातचीत करेगा।
डिजिटल डेस्क, ढाका। नई दिल्ली और ढाका के बीच रिश्तों में इन दिनों एक नया मोड़ देखने को मिल रहा है। बांग्लादेश के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने स्पष्ट किया है कि पिछली अवामी लीग सरकार के दौरान भारत के साथ हुए 101 समझौतों को रद करने की कोई योजना नहीं है।
इन समझौतों और सहमति-पत्रों की समीक्षा का मुख्य उद्देश्य किसी भी रिश्ते को तोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें दोनों देशों के लिए पूरी तरह 'विन-विन' यानी लाभकारी बनाना है। कमियों को दूर कर साझी समृद्धि ही लक्ष्य है क्योंकि कूटनीतिक संवाद और राष्ट्रीय हितों के तालमेल से ही दोनों देशों की मित्रता मजबूत होगी।
ढाका का यह भावपूर्ण और परिपक्व दृष्टिकोण यह विश्वास दिलाता है कि पड़ोसी देशों के बीच आपसी सम्मान और हितों का संतुलन सर्वोपरि है।
नुरुल इस्लाम मोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इन समझौतों को रद करने की कोई योजना नहीं है। यदि समीक्षा के दौरान किसी भी प्रविधान में कोई विसंगति या बांग्लादेश के राष्ट्रीय हितों के विपरीत बात सामने आती है, तो भारत के साथ मिलकर आपसी बातचीत से उसका सौहार्दपूर्ण समाधान निकाला जाएगा।
इस पूरी प्रक्रिया में कनेक्टिविटी, ऊर्जा सहयोग, बुनियादी ढांचे के विकास और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी संयम और परिपक्वता का परिचय देते हुए कहा है कि वह इस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा था, "हमने भी इस मामले पर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स देखी हैं, लेकिन हमें आधिकारिक तौर पर कुछ भी नहीं बताया गया है। जाहिर है, भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा।"
(समाचार एजेंसी एएनआई के इनपुट के साथ)
