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भारत के साथ संबंधों को 'रीसेट' करने की बांग्लादेश की पहल, नए अध्याय की शुरुआत

Published: Mon, 14 Sep 2026 02:00 AM (IST)

बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से "रीसेट" करने और आपसी हितों पर आधारित एक नए अध्याय की शुरुआत करने की इच्छा जताई है।

भारत के साथ संबंधों को 'रीसेट' करना चाहता है बांग्लादेश। (रॉयटर्स)

भारत के साथ संबंधों को 'रीसेट' करना चाहता है बांग्लादेश। (रॉयटर्स)

HighLights

  1. बांग्लादेश भारत के साथ संबंधों को 'रीसेट' करना चाहता है।

  2. पूर्व संबंधों को 'असहज' बताया, संतुलित दृष्टिकोण की वकालत की।

  3. गंगा जल संधि, तीस्ता जल बंटवारे पर कोई चर्चा नहीं हुई।

डिजिटल डेस्क, ढाका। बांग्लादेश ने भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह से "रीसेट" करने और आपसी हितों पर आधारित एक नए अध्याय की शुरुआत करने की इच्छा जताई है। बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने एक बयान में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासनकाल के दौरान दोनों देशों के बीच रहे संबंधों को "असहज" करार दिया।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश को भारत के प्रति अत्यधिक मोह से बाहर निकलकर, इसे किसी अन्य सामान्य देश की तरह संतुलित नजरिये से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें इस मानसिकता से ऊपर उठना होगा, क्योंकि हर वक्त भारत के बारे में सोचते रहने से देश अपने आंतरिक और राष्ट्रीय हितों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएगा।

यह कूटनीतिक बयान ऐसे समय में सामने आया है जब रविवार को संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर दोनों देशों के बीच चर्चाएं गर्म थीं।

भारत ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को बिम्सटेक के अध्यक्ष के तौर पर ब्रिक्स में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था, जबकि फरवरी से ही उन्हें अलग से द्विपक्षीय निमंत्रण भी भेजा जा चुका था। निमंत्रण मिलने के बाद यह स्पष्ट किया गया कि बांग्लादेश बहुपक्षीय मंचों की बजाय सीधे द्विपक्षीय वार्ताओं के जरिये मतभेदों को सुलझाना चाहता है।

इसके समानांतर, कूटनीतिक संवाद को जारी रखते हुए भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी और राज्य मंत्री फरहाद हुसैन आजाद से मुलाकात की। इस शिष्टाचार भेंट के दौरान दोनों पक्षों ने साझा इतिहास, संस्कृति और आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

हालांकि, इस बैठक में दिसंबर में समाप्त होने वाली 1996 की गंगा जल संधि के नवीनीकरण या तीस्ता नदी के जल-बंटवारे जैसे लंबित और संवेदनशील मुद्दों पर कोई आधिकारिक चर्चा नहीं हुई।

भविष्य की रणनीतियों पर बात करते हुए हुमायूं कबीर ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान आगामी 21 सितंबर से 26 सितंबर तक संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में भाग लेने न्यूयार्क जाएंगे, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के साथ संभावित मुलाकातों पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

भारत और बांग्लादेश के बीच पनप रही यह नई राजनीतिक सोच और कूटनीतिक कदम आने वाले समय में दोनों पड़ोसी देशों के रिश्तों की दिशा तय करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)