नई दिल्ली, एजेंसियां/ऑनलाइन डेस्क। दुनिया में ड्रोन युद्ध की शुरुआत हो चुकी है। अमेरिका ने इस युद्ध की राह दिखाई है और अब बाकी देश इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए युद्ध लड़ते दिख रहे हैं। इन दिनों आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच हो रहे युद्ध में इसी मिसाइलों से लैस ड्रोन का इस्तेमाल देखने को मिल रहा है। अजरबैजान ने मिसाइलों से लैस ड्रोन विमानों का इस्‍तेमाल करके आर्मेनिया के कई टैंक बर्बाद करने का दावा किया है, इसी के साथ दूसरे ड्रोन से इस हमले के रिकॉर्ड किए गए वीडियो को भी जारी किया है जिससे इसकी पुष्टि हो रही है।

अमेरिका ने इस्तेमाल करके दिखाई राह 

अमेरिकी सेना ने ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी को ड्रोन की मदद से मौत के घाट उतारा था। ये अपने आप में पहला मौका था जब अमेरिका ने इस तरह से ड्रोन की मदद से किसी देश के कमांडर की हत्या की थी। हालांकि इसके लिए अमेरिका को लगभग 18 माह तक कासिम की गतिविधियों पर नजर रखनी पड़ी थी, उसी के बाद वो उस पर हमला करके मारने में कामयाब हो पाए थे।

यदि अमेरिका कासिम सुलेमानी को किसी और तरीके से मारने की कोशिश करता तो शायद ही कामयाबी मिल पाती। अमेरिका ने इस तरह से कासिम पर ड्रोन से हमला करके एक नई तरह की तरकीब सुझाई थी। इससे पहले ड्रोन की मदद से सिर्फ सूचनाएं ही ली जाती थी और नजर रखी जाती थी मगर अमेरिका ने ड्रोन के माध्यम से इस तरह से हमला करके एक नए हथियार की राह दिखाई। इन दिनों अजरबैजान इसी का उपयोग कर रहा है। 

तुर्की से खरीदे हमलावर ड्रोन 

बताया जा रहा है कि अजरबैजान आर्मेनिया से लड़ने के लिए मैदान में तुर्की के हमलावर ड्रोन का इस्‍तेमाल कर रहा है। ये ड्रोन विमान उसने हाल ही में खरीदे थे। अजरबैजान ने तुर्की से बाकरकट टीबी 2 (Bayraktar TB2) ड्रोन लिया है। इस ड्रोन की खासियत ये है कि ये मध्‍यम ऊंचाई पर उड़ते हुए लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम है। अजरबैजान ने ड्रोन विमानों को आर्मेनिया से निपटने के लिए ही खरीदा था। अब वो उसका इस्तेमाल कर रहा है। आर्मेनिया के मिसाइल हमले में कई टैंक तबाह कर देने के बाद रविवार को अजरबैजान ने भी जवा‍बी हमला बोला।

बड़े पैमाने पर हो रहा आर्म्‍ड ड्रोन विमान का इस्तेमाल 

आर्म्‍ड ड्रोन विमानों के इस तरह के इस्तेमाल ने युद्ध के मैदान को एक नया हथियार मुहैया कराया है। सैन्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि आर्मेनिया और अजरबैजान के इस युद्ध से यह साबित हो रहा है कि अब तक इक्‍का-दुक्‍का हमलों में इस्‍तेमाल होने वाले आर्म्‍ड ड्रोन विमान अब बड़े पैमान पर मैदान-ए-जंग का हिस्‍सा बनने जा रहे हैं। यही नहीं व्‍यापक ड्रोन वॉरफेयर से निपटने के लिए अब दुनियाभर की सेनाओं को तैयार रहना होगा। उनका यह भी कहना है कि टैंक जैसे दूसरी पीढ़ी के हथियार अगर अपडेट नहीं किए गए तो वे धीरे-धीरे मैदान से बाहर होते चले जाएंगे। समय के साथ इन टैंकों को भी आधुनिक बनाए जाने की जरूरत है। 

बड़े हथियारों का किया जा रहा इस्तेमाल 

एजेंसियों के अनुसार इस अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच हो रहे युद्ध में दोनों ही देशों की ओर से फाइटर जेट, तोपखाने और रॉकेट का इस्‍तेमाल किया जा रहा है। इस लड़ाई में अब तक 60 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग घायल हैं। इसमें आम नागरिक और सेना के जवान दोनों शामिल है। 

तीन दिनों से हालात है खराब  

अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच बीते तीन दिनों से हालात खराब है। दोनों देशों की सेनाएं एक दूसरे के सैनिकों और टैकों को तबाह करने की योजना के तहत हमले कर रही हैं। लंबी दूरी की तोपों से हमले किए जा रहे हैं। मिसाइलों से लैस ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है और अंधाधुंध गोलीबारी हो रही है। 

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