सिडनी, एएनआइ। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से बड़ी चूक होने की खबर सामने आई है। पीएमओ ने गलती से सत्तारूढ़ गठबंधन लिबरल-नेशनल पार्टी के सांसदों की जगह पत्रकारों को गोपनीय दस्तावेज भेज दिए। सांसदों को ये दस्तावेज सोमवार से शुरू होने वाले संसद सत्र की तैयारी करने के लिए भेजे जाने थे।

शिन्हुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, ईमेल के जरिये भेजे गए इन गोपनीय दस्तावेजों में ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगने वालों की बढ़ती संख्या, टैक्स, सीरिया में चल रहे संघर्ष, जलवायु परिवर्तन पर हुए पेरिस समझौते और विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन अंसाजे जैसे तमाम मसलों पर बात की गई थी।

इनमें सत्तारूढ़ सांसदों को यह भी बताया गया था कि उन्हें इन मसलों पर पत्रकारों और विपक्ष के सवालों का जवाब किस सियासी रणनीति के साथ देना है। 8,200 शब्दों के इस दस्तावेज में बताया गया था कि अगर जलवायु परिवर्तन की रिपोर्ट के बारे में कोई सवाल पूछा जाए तो सांसद उसका जवाब टाल जाएं या यह कह दें, 'हम कार्बन टैक्स लगाए बगैर लक्ष्य हासिल कर लेंगे।' ऑस्ट्रेलिया में जब विपक्षी लेबर पार्टी सत्ता में थी तो उसने कार्बन टैक्स लगाने का प्रस्ताव पेश किया था।

गोपनीय दस्तावेज को लेकर हुई इतनी बड़ी चूक पर प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन की ओर से कोई बयान नहीं आया है। जबकि अटॉर्नी जनरल ने इस चूक को महत्व नहीं देते हुए कहा, 'आधुनिक राजनीति की दुनिया में इस तरह की चीजें होती रहती हैं।'

जनवरी में भारत आएंगे ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन पीएम मोदी के निमंत्रण पर जनवरी 2020 में भारत के दौरे पर आ रहे हैं। वह नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2020 में उद्घाटन भाषण देंगे। मॉरिसन ने कहा था कि मुझे जनवरी (2020) में भारत आने के लिए अपने मित्र प्रधानमंत्री मोदी के निमंत्रण स्वीकार करते हुए बहुत सम्मानित महसूस हो रहा है।

जियो-पॉलिटिक्स और जियो-इकोनॉमिक्स पर भारत का वार्षिक प्रमुख मंच रायसीना डायलॉग अगले साल 14 से 16 जनवरी तक आयोजित किया जाना है। सम्मेलन को विदेश मंत्रालय के सहयोग से ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) द्वारा आयोजित किया गया है। 

Posted By: Sanjeev Tiwari

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