स्टॉकहोम, एपी। साहित्य का नोबेल पुरस्कार देने वाली स्वीडिश अकेडमी की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। अकेडमी से जुड़े फोटोग्राफर जीन क्लाउड अर्नाल्ट को अपीलीय अदालत ने दुष्कर्म के एक और मामले में दोषी ठहराया है। उन्हें ढाई साल की सजा सुनाई गई है। इससे पहले निचली अदालत ने उन्हें एक मामले में दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनाई थी।

अर्नाल्ट नवंबर, 2017 में उस समय सुर्खियों में आए थे, जब 'मी टू' अभियान के तहत 18 महिलाओं ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा दिया। इस साल अक्टूबर में एक अदालत ने 72 वर्षीय अर्नाल्ट को दुष्कर्म के एक मामले में दोषी पाते हुए दो साल की सजा सुनाई थी। दुष्कर्म का यह मामला 2011 का है।

पीड़िता ने अर्नाल्ट पर दो बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। हालांकि निचली अदालत ने दूसरे आरोप को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि पीड़िता  की दलील विश्वसनीय नहीं है। अपीलीय अदालत ने सुनवाई करते हुए कहा, 'इस बात में कोई संदेह नहीं है कि अभियुक्त दुष्कर्म का दोषी है। पीड़िता का बयान उपलब्ध साक्ष्यों से मेल खाता है।' सजा सुनाते समय अदालत ने यह भी कहा कि अर्नाल्ट की उम्र को ध्यान में रखा गया है। अदालत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि मामला बहुत लंबे समय बाद जांच के लिए सामने आया।

अर्नाल्ट पर लगे आरोपों के बाद नोबेल कमेटी से जुड़े कुछ और यौन उत्पीड़न के मामले सामने आए थे। इन विवादों के चलते साहित्य के नोबेल पुरस्कारों का फैसला करने वाले 18 सदस्यीय बोर्ड के आठ सदस्यों ने खुद को अकेडमी से अलग करने का फैसला कर लिया था।

सदस्यों का कहना था कि ऐसे आरोपों के कारण पुरस्कार और अकेडमी की प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। अर्नाल्ट पर यह आरोप भी है कि उन्होंने सात बार नोबेल विजेताओं का नाम परिणाम घोषित होने से पहले ही लीक कर दिया था। विवादों को देखते हुए इस साल के साहित्य नोबेल पुरस्कार भी रद कर दिए गए। अगला साहित्य का नोबेल 2019 में दिया जाएगा।

Posted By: Arun Kumar Singh

अब खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस, डाउनलोड करें जागरण एप