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ग्लोबल वार्मिंग से तेजी से पिघल रहा आर्कटिक, क्यों रूस की सैन्य गतिविधियों से सहमा यूरोप?

Published: Tue, 15 Sep 2026 05:50 AM (IST)

आर्कटिक के तेजी से पिघलने से यह क्षेत्र दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए रणनीतिक महत्व का केंद्र बन गया ...और पढ़ें

ग्लोबल वार्मिंग से पिघल रहा आर्कटिक

ग्लोबल वार्मिंग से पिघल रहा आर्कटिक

HighLights

  1. आर्कटिक का पिघलना, रणनीतिक महत्व और सुरक्षा चुनौतियां बढ़ीं।

  2. रूस की सैन्य गतिविधियां यूरोप के लिए बड़ी चिंता का कारण।

  3. फिनलैंड में यूरोपीय आर्कटिक शिखर सम्मेलन में रणनीति पर चर्चा।

डिजिटल डेस्क, फिनलैंड। आर्कटिक की बर्फ जितनी तेजी से पिघल रही है, यह इलाका उतनी ही तेजी से दुनिया की बड़ी शक्तियों के लिए रणनीतिक महत्व का केंद्र बनता जा रहा है।

जलवायु परिवर्तन ने जहां नए समुद्री रास्तों और प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच की संभावनाएं बढ़ाई हैं, वहीं रूस की सैन्य गतिविधियों, चीन की बढ़ती कारोबारी दिलचस्पी और महत्वपूर्ण समुद्री ढांचे की सुरक्षा को लेकर यूरोप की चिंता भी बढ़ी है।

इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए फिनलैंड के रोवानिएमी में 13-14 सितंबर को यूरोपीय आर्कटिक शिखर सम्मेलन हुआ।फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेट्टेरी ओर्पो ने कहा कि आर्कटिक यूरोप के सुरक्षा वातावरण का तेजी से महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है।

बदलती जलवायु से समुद्री नौवहन के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का महत्व बढ़ रहा है। लेकिन इसके साथ सुरक्षा चुनौतियां भी बढ़ रही हैं। यूरोपीय नेताओं ने इसीलिए आर्कटिक के लिए साझा और अधिक सक्रिय रणनीति की जरूरत बताई। 12 यूरोपीय देशों ने भी यूरोपीय संघ से क्षेत्र में अधिक रणनीतिक और सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

आर्कटिक में रूस की गतिविधियां यूरोप के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में हैं। हाल में नाटो देशों ने स्वालबार्ड के पास समुद्र के नीचे संचार केबलों को निशाना बनाने की आशंका वाली रूसी गतिविधि को लेकर निगरानी बढ़ाई है।

नाटो के मुताबिक, 2026 के वसंत में ब्रिटेन, नार्वे और अमेरिका ने रूसी समुद्री इकाई की ऐसी गतिविधि को रोका था, जिसमें महत्वपूर्ण समुद्री केबलों के आसपास कार्रवाई की आशंका थी।

स्वालबार्ड को लेकर रूस-नार्वे तनाव भी बढ़ा है। 2 सितंबर को नार्वे ने एक रूसी शोध पोत प्रोफेसर मोलचानोव को जब्त किया था। यह कार्रवाई यूक्रेनी कंपनी नाफ्टोगाज को मिले अरबों डालर के मुआवजे की वसूली से जुड़ी थी। रूस ने इस कदम को ‘समुद्री डकैती’ बताया था।आर्कटिक का महत्व केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है।

समुद्री बर्फ घटने से रूस के उत्तरी समुद्री मार्ग और एशिया-यूरोप के बीच वैकल्पिक नौवहन मार्गों की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालिया शोध के अनुसार, बर्फ की मोटाई घटने के साथ रूस का नार्दर्न सी रूट कुछ परिस्थितियों में स्वेज मार्ग के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है।

होर्मुज और अन्य पारंपरिक समुद्री मार्गों में अस्थिरता से भी आर्कटिक मार्गों का रणनीतिक महत्व बढ़ सकता है।ग्रीनलैंड भी इस नई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम हिस्सा बन गया है।

यूरोपीय आयोग ने सितंबर में ग्रीनलैंड के लिए 20 करोड़ यूरो के नए पैकेज की घोषणा की है। इसका इस्तेमाल डिजिटल संपर्क, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, मत्स्यपालन और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े क्षेत्रों में किया जाएगा।

(न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)