नई दिल्‍ली [जागरण स्‍पेशल]। पृथ्‍वी अनगिनत बार प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ चुकी है। मानवता अक्सर उनकी चपेट में आ चुकी है। प्रलय की ऐसी घटनाओं में सुनामी से लेकर हमारे पूर्वजों पर पूरे शहर में आग बरसाने वाला एक प्रागैतिहासिक धूमकेतु शामिल रही हैं।

इस सूची को इतिहास में प्राचीन मूल की घटनाओं को रखा जा सकता है। जिस वर्ष सूर्य काला पड़ गया, जिसे कुछ लोगों द्वारा याद किया जाता है, लेकिन 536 ईस्वी सन् मानवता के इतिहास में सबसे घातक हो सकती है। एक इतिहासकार द्वारा 'जीवित रहने के लिए सबसे खराब वर्ष' के रूप में वर्णित किया है। इसने इसे ऐसी अवधि को चिह्नित किया जिसमें पृथ्वी को स्थायी अंधकार में डुबो दिया गया था।

डेढ़ वर्ष तक सूर्य छिपा रहा
दैवी साहित्‍य के अनुसार यूरोप, मध्य पूर्व और एशिया के कुछ हिस्सों में एक रहस्यमय कोहरे की छाया फैल गई थी, जिसने 18 महीने तक सूर्य, दिन और रात को अवरुद्ध कर दिया था। बैजांटिन इतिहासकार प्रोकोपियस ने लिखा है कि पूरे वर्ष के दौरान सूर्य ने चंद्रमा की तरह बिना चमक के अपना प्रकाश दिया। आइसलैंड में कोहरे से निकले एक ज्‍वालामुखी से बेरहम धूल के बादल के कारण भारी विस्‍फोट हुआ था। धूप की कमी का मतलब है कि फसलें उगना बंद हो गईं, जिससे लंबा अकाल पड़ा।

आयरलैंड में 536 ईस्वी को 'रोटी की विफलता' के रूप में वर्णित किया गया था। एक अकाल ने देश को तीन साल तक जकड़े रखा। हम नहीं जानते कि इस आपदा के दौरान कितने लोगों की मौत हुई और उसके बाद यह संभव है कि यह अशांति के वर्ष लाखों लोगों को प्रभावित किया हो।

सुनामी जिसने सभ्यताओं को मिटा दिया
हजारों प्रागैतिहासिक लोग एक बार यूरोप और ब्रिटेन के बीच उत्तरी सागर के आसपास स्थित द्वीपों पर रहते थे। 'डोगरलैंड' क्षेत्र को उपकरण और मछली पकड़ने के जाल के रूप में दर्शाया जाता है, जिसमें आज की तुलना में इसमें बहुत कम पानी था। मेसोनिथिक जनजातियों द्वारा कई सदियों से कब्जा कर लिया गया था। यह सब तब बदल गया, जब नॉर्वे के पास एक भयावह भूस्खलन ने लगभग 8200 साल पहले उत्तरी सागर में 3,000 घन किलोमीटर क्षेत्र को मलबे में बदल दिया। इसने डोगरलैंड के लोगों का सफाया करने वाली पांच मीटर की सुनामी पैदा की, जो कहीं नहीं छिपी थी। इस लहर की तुलना जापान में घातक 2011 सुनामी से की गई है जिसमें 16,000 लोग मारे गए थे।

विसुवियस का विस्फोट
4 अगस्‍त, 79 ईस्‍वी को इटली के माउंट विसुवियस के इतिहास में सबसे हिंसक ज्वालामुखी विस्फोटों में से एक रहा। इसने पत्थर, राख और ज्वालामुखीय गैसों को हवा में 21 मील की दूरी पर हवा में उड़ाकर हजारों क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड में पहुंचा दिया। इसकी तापीय ऊर्जा हिरोशिमा-नागासाकी में हुए परमाणु विस्फोटों की तुलना में सौ हजार गुना अधिक थी।

इसके ज्वालामुखी कचरे के कारण रोमन शहर पोम्पेई और हरकुलेनियम को पूरी तरह से दफन कर दिया, जिसमें 13 हजार लोग मारे गए। आज तक वैज्ञानिक विसुवियस के किनारे सांस्कृतिक, वास्तुकला और मानव अवशेष पाते हैं। इटली में नेपल्स की खाड़ी पर स्थित कैंपनिया में आज भी पृथ्वी का सबसे खतरनाक ज्वालामुखी बना हुआ है।

मानवता पर आग बरसाता धूमकेतू
आज से 13,000 साल पहले यूरोप और पश्चिमी एशिया में एक विशाल धूमकेतु या क्षुद्रग्रह का विस्फोट हुआ था। इसने पृथ्वी पर आग के टुकड़ों को गिरा दिया। इसने जमीन पर कटी हुई घास की तरह प्रागैतिहासिक लोगों को साफ कर दिया। इसके विनाशकारी प्रहारों के गवाहों के रूपी पत्थर की नक्काशी के साथ एक स्थायी स्मारक बना दिया। तुर्की में खोजे गए प्रसिद्ध लुटेरे स्टोन में खोदे गए एक सिरहीन व्यक्ति की छवि को मानव आपदा और जीवन के व्यापक नुकसान का प्रतीक माना जाता है।

वैज्ञानिकों को भी लगता है कि लगभग 13,000 साल पहले उत्तरी अमेरिका में एक प्राचीन अंतरिक्ष चट्टान का विस्फोट हुआ था। इसका प्रभाव तबाही मचाने वाला था। इसने वन्‍यजीवों को मिटा दिया जिसने पूरे महाद्वीप में नए सिरे से वन्यजीवों की स्थापना की। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, कैरोलिना के जंगल में पृथ्‍वी में झटके से तोड़ा गया विशालकाय छेद का मलबा है। तुर्की में प्रागैतिहासिक न हिलने वाले मनुष्यों को प्रभावित करने वाले अंतरिक्ष चट्टान के कारण भी हो सकते हैं।

नेपोलिस का पतन
1600 वर्ष पहले सुनामी के कारण रोमन शहर का पतन हो गया था। ट्यूनीशिया के उत्तरपूर्वी तट पर ऊंचाई पर बसे नेपोलिस शहर को इतिहास में कई बार स्‍थान बदलना पड़ा। यूनानी समझौते के रूप में पहले कार्थाजियन काल के रूप में इसकी शुरुआत हुई। फिर रोमन, तत्‍कालीन अरब शासन के रूप में राजकाज का दौर चला। इसे 365 ईस्वी में सूनामी ने एक झटके से तोड़ दिया।

इसका अधिकांश हिस्सा जलमग्न हो गया। पुरातत्वविद् इसके माध्यम से आज भी खुदाई करते हैं। बहुत कम लोगों को पता है कि आपदा ने नेपोलिस के लोगों को कैसे प्रभावित किया लेकिन पता चलता है कि प्राचीन यूनान में अलेक्जेंड्रिया और क्रेते में एक ही लहर ने चपेट में ले लिया था। अलेक्जेंड्रिया में लगभग पांच हजार लोगों की मौत हो गई और 50 हजार घर नष्‍ट हो गए थे।

माया सभ्‍यता का पतन
माया एक उन्नत सभ्यता थी जो मेक्सिको सहित मध्य अमेरिका के कुछ हिस्सों में पनपी थी। उन्‍होंने मंदिरों और पेचीदा जलमार्गों के साथ उन्‍नत शहरों का निर्माण किया। एक हजार साल पहले मेक्सिको में फैले बड़े पैमाने पर सूखे ने प्राचीन माया सभ्‍यता खत्‍म होने की ओर आगे बढ़ गई।

इस क्षेत्र में बड़े राजनीतिक नुकसान से पहले कुछ समय पहले बारिश में 70% की गिरावट आई थी। इसके बाद लोगों ने राज्य को छोड़ दिया। श्रेष्‍ठ माया सभ्‍यता का पतन लंबे समय से बहस का विषय रहा है। इसके विनाश का कारण वर्षों तक‍ पड़ा सूखा रहा। युद्ध, आक्रमण और व्यापार मार्गों के नुकसान ने भी यहां भारी तबाही मचाई।  

लोकसभा चुनाव और क्रिकेट से संबंधित अपडेट पाने के लिए डाउनलोड करें जागरण एप

Posted By: Arun Kumar Singh

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस