विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'अफ्रीका को स्थायी सीट न मिलना ऐतिहासिक अन्याय, अब बदलना होगा ढांचा', गुटेरस का बड़ा बयान

Published: Wed, 23 Sep 2026 06:54 AM (IST)

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर एक बार फिर जोर देते हुए कहा ...और पढ़ें

यूएन प्रमुख ने कहा- आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व करे सुरक्षा परिषद

यूएन प्रमुख ने कहा- आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व करे सुरक्षा परिषद

HighLights

  1. यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा सुरक्षा परिषद में सुधार अब टाला नहीं जा सकता

  2. अफ्रीका को स्थायी सीट नहीं मिलना अन्यायपूर्ण, व्यवस्था में बदलाव जरूरी 

  3. यूएन प्रमुख ने कहा- आज की दुनिया का प्रतिनिधित्व करे सुरक्षा परिषद

पीटीआई, संयुक्त राष्ट्र। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने सुरक्षा परिषद में सुधार की जरूरत पर एक बार फिर जोर देते हुए कहा है कि अब समय आ गया है कि परिषद आज की दुनिया की वास्तविकताओं का प्रतिनिधित्व करे।

81वीं महासभा के उद्घाटन सत्र में मंगलवार को अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सुरक्षा परिषद के पास पर्याप्त वैधता और प्रतिनिधित्व होना जरूरी है।

गुटेरस का यह बयान भारत की लंबे समय से चली आ रही मांग से भी मेल खाता है। भारत सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार के साथ स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने और विकासशील देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की वकालत करता रहा है।

1945 की व्यवस्था अब बदली दुनिया से पीछेगुटेरस ने कहा कि सुरक्षा परिषद का ढांचा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की परिस्थितियों में बनाया गया था। लेकिन उसके बाद दुनिया की राजनीतिक, आर्थिक और सामरिक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। इसके बावजूद वैश्विक शासन की संस्थाएं अब भी काफी हद तक पुराने दौर की शक्ति-संरचना को ही दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण अफ्रीका है। संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के समय अफ्रीका का बड़ा हिस्सा औपनिवेशिक शासन के अधीन था। आज 55 देशों वाले इस महाद्वीप का सुरक्षा परिषद में कोई स्थायी प्रतिनिधित्व नहीं है।

गुटेरस ने इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए कहा कि इस स्थिति को बदलना जरूरी है। संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक दस्तावेज भी अफ्रीका के स्थायी प्रतिनिधित्व के अभाव को सुधार की प्रमुख मांग के रूप में दर्ज करते हैं।

बहुध्रुवीय दुनिया, पुरानी संस्थाएंगुटेरस ने कहा कि दुनिया साफ तौर पर बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है और इस बदलाव को पलटा नहीं जा सकता। उनके मुताबिक समस्या यह है कि वैश्विक संस्थाएं इस बदलती शक्ति-संरचना के अनुरूप खुद को ढाल नहीं पा रही हैं।

उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक विभाजन बढ़ रहा है, असमानताएं गहरी हो रही हैं और देशों के बीच भरोसा कमजोर पड़ रहा है। ऐसे समय में जब दुनिया को एक साथ कई गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है, सामूहिक कार्रवाई के लिए बनाई गई व्यवस्थाओं पर दबाव भी बढ़ रहा है।

जलवायु और एआई भी बड़ी चुनौती

गुटेरस ने जलवायु संकट को भी गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की वास्तविकता बन चुका है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) के तेजी से बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। गुटेरस ने कहा कि एआइ जिस गति से विकसित हो रहा है, उससे उसके निर्माता भी हैरान हैं। ऐसे दौर में जब आर्थिक, राजनीतिक और तकनीकी शक्ति के नए केंद्र उभर रहे हैं, वैश्विक संस्थाओं में भी उसी के अनुरूप बदलाव जरूरी है।