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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 02, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

यूक्रेन संकट को देख अमेरिका की ताइवान को लेकर चिंता बढ़ी, कहा- ताइपे में शांति व स्थिरता पूरे विश्व के हित में

By Ramesh MishraEdited By:
Published: Wed, 02 Mar 2022 05:39 PM (IST)Updated: Wed, 02 Mar 2022 06:21 PM (IST)

रूस और यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका को ताइवान की चिंता सताने लगी है। अमेरिका को यह भय सता रहा ...और पढ़ें

यूक्रेन संकट को देख अमेरिका ताइवान को लेकर चिंतित। फाइल फोटो।
यूक्रेन संकट को देख अमेरिका ताइवान को लेकर चिंतित। फाइल फोटो।

ताइपे, जेएनएन/एजेंसी। रूस और यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका को ताइवान की चिंता सताने लगी है। अमेरिका को यह भय सता रहा है कि जिस तरह से रूस ने यूक्रेन ने हमला कर दिया कहीं उससे प्रेरित होकर चीन भी ताइवान के साथ युद्ध का ऐलान न कर दें। अगर ऐसा हुआ तो इस जंग में अमेरिका क्‍या करेगा? अमेरिका ने यूक्रेन को किसी तरह युद्ध में सैन्‍य मदद देने से इन्‍कार कर दिया है, लेकिन ताइवान के लिए उसकी वह स्थिति नहीं है। ताइवान और अमेरिका के बीच रक्षा संधि के चलते वह उसकी सैन्‍य मदद से मुकर नहीं सकता है।

जलडमरूमध्य में शांति व स्थिरता न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरे विश्व के हित में

उधर, यूक्रेन पर रूसी हमले के बीच दो दिवसीय दौरे पर ताइवान पहुंचे अमेरिका के ज्वाइंट चीफ्स आफ स्टाफ माइक मुलेन ने बुधवार को कहा कि जलडमरूमध्य में शांति व स्थिरता न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरे विश्व के हित में है। उन्होंने ताइवान की हरसंभव मदद की अमेरिकी प्रतिबद्धता भी दोहराई। इस बीच, ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन, उप राष्ट्रपति विलियम लाई व प्रधानमंत्री सु सेंग-चांग ने युद्धग्रस्त यूक्रेन में राहत कार्यो के लिए एक-एक महीने का वेतन दान करने का एलान किया है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे मुलेन ने कहा, 'हम विश्व इतिहास के बहुत ही कठिन और महत्वपूर्ण क्षण में ताइवान आए हैं। जैसा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है, लोकतंत्र निरंतर खतरनाक चुनौतियों का सामना कर रहा है। हालिया उदाहरण यूक्रेन है। लोकतंत्र को अब पहले से कहीं ज्यादा रक्षकों की जरूरत है।'

रूसी हमले के बाद ताइवान की चिंता बढ़

यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद ताइवान की चिंता बढ़ गई है। उसे लगता है कि चीन भी ऐसा कर सकता है। यूक्रेन एक स्वशासित लोकतांत्रिक देश है, लेकिन चीन उसे अपना हिस्सा बताता है। वह ताइवान की वायुसीमा में अपने जंगी विमानों को भेजकर उसे धमकाता रहता है। अमेरिका, ताइवान को सैन्य हथियार प्रदान करता है और यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है कि द्वीप अपनी रक्षा कर सकता है। मुलेन ने कहा कि उनके प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा ताइवान के साथ अमेरिका की मजबूत साझेदारी के समर्थन की द्विदलीय प्रकृति को दर्शाती है।

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