नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। AIDS एक ऐसी बीमारी, जिसका पुख्ता इलाज आज भी पूरी दुनिया के लिए चुनौती बना हुआ है। शोधकर्ता अभी इस बीमारी से निपटने की राह भी नहीं तलाश सके थे कि अब उनके सामने इससे भी बड़ी और खतरनाक बीमारी सामने आ गई है। दावा किया जा रहा है कि ये जानलेवा बीमारी पूरी दुनिया में एड्स से भी तेजी से फैल रही है। एड्स की तरह इस दूसरी खतरनाक बीमारी की भी प्रमुख वजह असुरक्षित यौन संबंध है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार एड्स से भी ज्यादा तेजी से फैल रही इस बीमारी का नाम है सिफिलिस। बताया जा रहा है कि पिछले एक दशक में इस बीमारी का प्रकोप काफी ज्यादा बढ़ा है, खासतौर पर यूरोप में। वर्ष 2000 के दशक के बाद ये बीमारी कुछ देशों में एचआईवी के मुकाबले ज्यादा तेजी से फैली है। सिफिलिस नाम की इस बीमारी से वर्ष 2016 में सबसे ज्यादा नवजात बच्चों की मौत हुई थी।

समलैंगिक पुरुषों को भी खतरा

यूरोप के रोग निवारण व नियंत्रण केंद्र की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षित यौन संबंध बेहद जरूरी है। समलैंगिक पुरुषों में भी असुरक्षित संबंधों की वजह से इस बीमारी का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। 2010 के बाद से असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से इस रोग के मामलों में 70 फीसद तक की वृद्धि दर्ज की गई है।

प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा नए मरीज

यूरोपीयन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ECDC) में यौन संक्रमण संबंधी मामलों के विशेषज्ञ एंड्रयू अमातो-गोची ने न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा, 'यूरोप सहित दुनिया के अन्य देशों में सिफिलिस बीमारी के बढ़ने की कई वजहें हैं। साथी संग असुरक्षित यौन संबंध, कई लोगों के साथ यौन संबंध बनाना और एचआईवी संक्रमण का डर समाप्त होना शामिल है।' मालूम हो कि सिफिलिस पर ये यूरोपीयन रिपोर्ट आने से करीब एक माह पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बयान जारी कर बताया था कि दुनिया भर में प्रतिदिन तकरीबन एक लाख से ज्यााद लोग असुरक्षित यौन संबंधों की वजह से, संक्रमण संबंधी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

10 साल में ढाई लाख से ज्यादा मरीज

विशेषज्ञों के अनुसार सिफिलिस बीमारी महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए एक जैसी ही गंभीर समस्या बनी हुई है। इससे नवजात बच्चों की मौत तक हो जाती है। साथ ही इस बीमारी की चपेट में आने से एचआईवी का खतरा भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य व बीमारियों की निगरानी करने वाली यूरोपीयन संस्था ईसीडीसी के अनुसार वर्ष 2000 के बाद एचआईवी के मुकाबले सिफलिस के मरीजों की संख्या ज्यादा रही है। वर्ष 2007 से 2017 के बीच 30 देशों में सिफिलिस के 2,60,000 (दो लाख 60 हजार) मामले सामने आए थे। इस बीमारी के सबसे ज्यादा 33 हजार मामले वर्ष 2017 में सामने आए थे।

पांच देशों में सबसे ज्यादा है सिफिलिस

ईसीडीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिफिलिस की समस्या पांच देशों में सबसे ज्यादा है। ये देश हैं ब्रिटेन, जर्मनी, आयरलैंड, आइसलैंड और माल्टा। इन देशों में सिफिलिस की समस्या वैश्विक औसत के मुकाबले दोगुनी से ज्यादा बढ़ी है। केवल एस्टोनिया और रोमानिया ही दो ऐसे देश हैं, जहां इस बीमारी में 50 फीसद से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है। इतना ही नहीं संस्था की रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच सामने आए सिफिलिस के कुल मामलों में से दो तिहाई मामले समलैंगिक पुरुषों में, 23 फीसद मामले महिलाओं संग संबंध बनाने वाले पुरुषों में और 15 प्रतिशत मामले महिलाओं में सामने आए हैं। इन सबकी वजह असुरक्षित यौन संबंध है।

ऐसे मिलेगी निजात

लात्विया, लिथुआनिया और रोमानिया में 20 प्रतिशत से कम और फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, नीदरलैंड, स्वीडन व ब्रिटेन में 80 फीसद से ज्यादा मामले समलैंगिक पुरुषों के रहे हैं। सबसे हैरानी की बात ये है कि ये बीमारी उन समलैंगिक पुरुषों में सबसे ज्यादा देखी गई है, जिनके बीच एड्स का डर नहीं रहता है। एड्स का डर न होने की वजह से यौन संबंधों के दौरान ये समलैंगिक सुरक्षित संबंधों की अनदेखी करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार तेजी से पांव पसार रही इस समस्या से निजात पाने का सबसे कारगर उपाय यौन संबंधों के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करना है।

एड्स का खतरा

दुनिया में सबसे ज्यादा एड्स रोगी दक्षिण अफ्रीका में पाए जाते हैं। यहां प्रत्येक 10 में से एक व्यक्ति एचआईवी संक्रमित है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकारी स्वास्थ्य विभाग वहां कई तरह के कंडोम मुफ्ट में वितरित कराता है। जानकारों के अनुसार लगभग पूरी दुनिया में सुरक्षित यौन संबंधों पर खुलकर बात नहीं होती। पश्चिमी देश भी इस मामले में काफी पीछे हैं। एड्स जैसी घातक बीमारी से बचने के लिए कंडोम सबसे कारगर उपाय है, बावजूद पूरी दुनिया में महिला कंडोम ज्यादा लोकप्रिय नहीं हुआ। पश्चिमी देशों में भी महिला कंडोम की बिक्री न के बराबर है। इसे बढ़ावा देने के लिए अफ्रीका के मोजांबिक में कुछ एनजीओ अभियान चला रहे हैं। इनका मकसद महिलाओं को इस घातक बीमारी से सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर एड्स पीड़ितों को जागरूक किया जाए और सुरक्षित यौन संबंध सुनिश्चित हो तो 50 साल में एड्स को पूरी तरह से खत्म किया जा सकता है।

Posted By: Amit Singh

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