पीओजेके और जम्मू-कश्मीर में बढ़ते अंतर पर यूएनएचआरसी में अख्तर ने उठाए सवाल
अख्तर ने कहा कि आधुनिक दौर में मानवाधिकारों का उद्देश्य समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और लोगों की बुनियादी जरूरतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।

पीओजेके और जम्मू-कश्मीर में बढ़ते अंतर पर यूएनएचआरसी में अख्तर ने उठाए सवाल (फोटो- एएनआई)
HighLights
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा- पीओजेके में नागरिकों की मौतों की स्वतंत्र जांच हो यूकेपीएनपी अध्यक्ष शौकत बोले
पीओजके में दमन बढ़ा, अधिकारों की मांग करना अपराध नहीं
एएनआई, जिनेवा। जम्मू-कश्मीर की मानवाधिकार कार्यकर्ता तस्लीमा अख्तर ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 63वें सत्र में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) और जम्मू-कश्मीर के बीच शासन, नागरिक स्वतंत्रता, मानवाधिकार और विकास के क्षेत्र में बढ़ते अंतर का मुद्दा उठाया।
अख्तर ने कहा कि आधुनिक दौर में मानवाधिकारों का उद्देश्य समावेशी विकास, लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना और लोगों की बुनियादी जरूरतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए।
पीओजेके में हालिया घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) और अन्य नागरिक संगठनों के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शनों का जिक्र किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तानी अधिकारियों ने गिरफ्तारियां की। लोगों को हिरासत में लिया और संचार प्रतिबंध लगाए। सुरक्षा बलों तथा प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं।
जून 2026 की रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके में करीब दो सप्ताह तक चले तनाव के दौरान कम से कम 24 लोगों की जान गई जबकि 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया।
अख्तर ने पीओजेके में नागरिकों की सुरक्षा, संचार व्यवस्था बहाल करने और मौतों की स्वतंत्र जांच की मांग की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करते हुए वहां के कौशल विकास, बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़ी पहलों को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों से युवाओं और स्थानीय व्यवसायों के लिए नए अवसर विकसित हो रहे हैं।
यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के अध्यक्ष सरदार शौकत अली कश्मीरी ने यूएनएचआरसी से पीओजेके और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में मानवाधिकारों की बिगड़ती स्थिति पर तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है।
कश्मीरी ने आरोप लगाया कि पांच जून 2026 से पीओजेके में दमन बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि मौतों, चोटों, और मनमान रूप से हिरासतों में लेने की रिपोर्टों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा-"शांतिपूर्ण असहमति आतंकवाद नहीं है और अधिकारों की मांग करना अपराध नहीं है।" पालीटिकल एक्टिविस्ट जमील मकसूद ने भी इस क्षेत्र में जवाबदेही, स्वतंत्र निगरानी और संचार व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
