'सतर्क रहें, विरोध स्थलों से दूर रहें'... फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारत ने नागरिकों के लिए जारी की एडवायजरी
फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद भारतीय दूतावास ने बुधवार को अपने नागरिकों के लिए यात्रा एवं सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की।

फ्रांस में प्रदर्शनों से पहले भारत ने नागरिकों से विरोध स्थलों से दूर रहने की अपील की
HighLights
भारतीय दूतावास ने सभी से सतर्क रहने, प्रदर्शन वाले भीड़भाड़ वाले स्थानों से दूर रहने को कहा
भारतीयों को फ्रांस में फ्रांसीसी अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने को कहा है
डिजिटल डेस्क, पेरिस। फ्रांस में अभी तक हिंसा और प्रदर्शन रुके नहीं हैं। फ्रांस में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद भारतीय दूतावास ने बुधवार को अपने नागरिकों के लिए यात्रा एवं सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की।
इसमें फ्रांस में रह रहे और वहां यात्रा करने वाले भारतीयों को सतर्क रहने तथा प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
दूतावास ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर कहा कि स्थानीय स्तर पर कर्फ्यू लगाए जाने और सड़क तथा सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में व्यवधान की आशंका को देखते हुए नागरिक फ्रांसीसी अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें।
यात्रियों को उड़ानों के समय में बदलाव की जानकारी के लिए अपनी एयरलाइंस या ट्रैवल एजेंसियों के संपर्क में रहने को भी कहा गया है।
दूतावास ने नागरिकों को स्थानीय समाचारों और आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखने की सलाह दी है। आपात स्थिति में पेरिस स्थित भारतीय दूतावास से +33 6 48 34 00 63 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।
यह सलाह शनिवार, 24 अक्टूबर को होने वाले नए प्रदर्शनों से पहले जारी की गई है। 17 अक्टूबर को हुए दंगों में व्यापक नुकसान हुआ था और हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि सरकार हिंसा की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी कानूनी उपायों का इस्तेमाल करेगी। उन्होंने आपातकाल की घोषणा फिलहाल जरूरी नहीं बताई, लेकिन जरूरत पड़ने पर इस पर विचार किया जा सकता है।
फ्रांसीसी अधिकारियों ने कई शहरों में लक्षित कर्फ्यू लगाए हैं। आंतरिक मंत्री ने शनिवार के प्रदर्शनों के दौरान हिंसा रोकने के लिए सेना की ‘ऑपरेशन सेंटिनेल’ की टुकड़ियों को तैनात करने की बात कही है।
ये प्रदर्शन सितंबर 2026 के अंत में स्कूलों की खराब स्थिति और शिक्षकों की कमी को लेकर शुरू हुए थे, जो बाद में महंगाई, ऊंचे ईंधन दामों, बजट कटौती और मैक्रों सरकार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन में बदल गए।
