कुआला लुम्पुर, रॉयटर्स। भारत सरकार द्वारा 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से विशेष दर्जा वापस लेते हुए वहां लगा हुआ Article 370 हटा दिया गया। इससे पूरी दुनिया में सबसे बड़ा झटका पाकिस्तान को लगा, क्योंकि वह कश्मीर में अपने गलत मंसूबों से भारत में जहर फैलाना चाहता था। हालांकि, भारत सरकार द्वारा एक झटके में 370 को हटा दिया गया। वहीं, पाकिस्तान ने दुनिया के मंच पर भी यह मुद्दा उठायास, लेकिन उसे इसमें सफलता नहीं मिली। सिर्फ चीन जो हमेशा से ही साथ रहता है पाकिस्तान के उसने कश्मीर पर भारत के खिलाफ बयान दिया था। अब एक और देश है, जो इस समय कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ बयान दे रहा है। यह देश है मलेशिया।

भारत से ऐसे लड़ेगा मलेशिया

मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने हाल ही में कश्मीर को लेकर भारत को निशाना पर लिया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर को एक देश बताया जहां भारत ने घुसपैठ की। महातिर ने कहा था कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की अनदेखी उसके प्रति अनादर और कानून तोड़ने वाली है। मलेशिया के प्रधानमंत्री के ऐसे बयान के बाद उसे मुंह तोड़ जवाब देने की तैयारी की गई और भारत की आलोचना से नाराज भारतीय कारोबारियों ने मलेशिया से पाम तेल आयात के नए सौदे करना बंद कर दिया है।

हालांकि, भारत सरकार द्वारा इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया, लेकिन घरेलू खाद्य तेल उद्योग ने मलेशिया को कड़ा जवाब दिया। अब जहां इसके बाद मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का एक बयान सामने आया है। मलेशिया की समाचार एजेंसी Bernama के अनुसार, प्रधान मंत्री महाथिर मोहमद ने बुधवार को कहा कि मलेशिया, भारत के साथ कूटनीतिक रूप से बात करेगा। बता दें कि यह बयान तब सामने आया है जब पिछले सप्ताह खबर सामने आई थी कि प्रधानमंत्री मोहम्मद के कश्मीर पर नई दिल्ली की आलोचना के बाद कुछ कदम उठाए जा सकते हैं, जिसमें मलेशिया के कुछ उत्पादों के आयात पर अंकुश लगाया जा सकता है, इसमें पाम तेल का भी जिक्र किया गया।

Bernama के हवाले से, महातिर द्वारा कहा गया, 'यदि (भारतीय) सरकार ने बहिष्कार या ऐसा कुछ शुरू किया, तो हमें कूटनीतिक रूप से काम करना होगा।' बता दें कि पाम तेल के मामले में मलेशिया दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है, इंडोनेशिया के बाद। वहीं, भारत तेल के लिए मलेशिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार है।

रिपोर्ट में उस बात का भी जिक्र किया गया, जिसमें कहा गया कि भारत के घरेलू खाद्य तेल उद्योग ने मलेशिया से आयात करने बंद कर दिया Bernama के हवाले से कहा गया कि अभी मलेशिया, भारत के व्यापारिक समुदाय के द्वारा उठाए गए व्यक्तिगत निर्णयों पर प्रतिक्रिया नहीं दे सकता।

आपको बता दें कि मलेशिया ने मंगलवार को यह भी कहा कि वह भारत से कच्ची चीनी और भैंस के मांस के आयात को बढ़ाने पर विचार करेगा, अगर यह व्यापार तनाव को कम होता है तो। बता दें कि कश्मीर पर मलेशिया का बेबुनियाद बयान यह भी साफ करता है कि उन्हें यह पता ही नहीं कि जम्मू-कश्मीर कोई देश नहीं, बल्कि ब्रिटिश भारत में एक रियासत थी और उसके शासक ने भारत के साथ विलय की संधि की थी। वास्तव में पाकिस्तान ने आक्रमण करके कश्मीर के हिस्से अवैध रूप से कब्जा लिए। महातिर का भारत को आक्रांता और कश्मीर को देश बताना यही दर्शाता है कि या तो उन्हें गलत जानकारी दी गई या बढ़ती उम्र के साथ उनकी बुद्धि उनका साथ नहीं दे रही है।

मलेशिया ने हमेशा दिया पाकिस्तान का साथ

1965 में हुए भारत-पाक युद्ध को छोड़ दें तो घरेलू राजनीतिक-धार्मिक दबावों के चलते मलेशिया ने हमेशा पाकिस्तान का साथ दिया है। मलेशिया की 61.3 फीसद जनसंख्या सुन्नी मुसलमानों की है और पाकिस्तान की तरह यहां की बहुसंख्यक आबादी इस्लाम की सलाफी और वहाबी विचारधारा को मानती है। कश्मीर पर अपनी टिप्पणियों से महातिर ने रूढ़िवादी मलय मुसलमानों की खुशामद का प्रयास किया है।

Posted By: Nitin Arora

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