विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मौत के बाद खाद बनेगा इंसान का शरीर, तीन महीने में धरती को लौटेंगे पोषक तत्व

Published: Mon, 26 Oct 2026 10:35 PM (IST)

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में 'टेरामेशन' को कानूनी मंजूरी मिली है, जिससे इंसान के शरीर को खाद में बदलने का विकल्प उपलब्ध होगा।

मौत के बाद खाद बनेगा इंसान का शरीर।  (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

मौत के बाद खाद बनेगा इंसान का शरीर। (यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है)

HighLights

  1. ऑस्ट्रेलिया में 'टेरामेशन' को मिली कानूनी मंजूरी।

  2. सूक्ष्मजीवों से 2-3 महीने में शरीर खाद में बदलेगा।

  3. पर्यावरणीय चिंताओं और कब्रिस्तान की कमी का समाधान।

डिजिटल डेस्क, पर्थ। मौत के बाद शरीर को दफनाना या शवदाह करना अब तक आम विकल्प रहे हैं। लेकिन क्या इंसान का शरीर खाद बनकर भी धरती में लौट सकता है?

ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स में इस विकल्प को कानूनी मंजूरी मिलने के बाद यह सवाल चर्चा में है। इस प्रक्रिया को ‘टेरामेशन’ कहा जाता है। इसमें नियंत्रित परिस्थितियों में सूक्ष्मजीवों की मदद से मानव अवशेषों को खाद जैसी पोषक सामग्री में बदला जाता है।

टेरामेशन में मृत शरीर को प्राकृतिक कफन में लपेटकर लकड़ी के बुरादे, पुआल और अल्फाल्फा जैसी जैविक सामग्रियों के साथ एक विशेष पात्र में रखा जाता है। नमी, हवा और तापमान को नियंत्रित किया जाता है, ताकि सूक्ष्मजीव तेजी से अपघटन कर सकें। इस दौरान तापमान करीब 55 से 70 डिग्री सेल्सियस रखा जाता है, जिससे रोगाणुओं को नष्ट करने में भी मदद मिलती है।

तीन महीने में खाद जैसी सामग्री हो सकती है तैयार 

करीब दो से तीन महीने में खाद जैसी सामग्री तैयार हो सकती है। हालांकि, हड्डियां, दांत और कुछ कृत्रिम प्रत्यारोपण पूरी तरह नहीं गलते। हड्डियों को अलग से संसाधित करना पड़ सकता है, जबकि कृत्रिम प्रत्यारोपण निकालने होते हैं।

परंपरागत दफन में शरीर को पूरी तरह अपघटित होने में कई साल, यहां तक कि दशकों लग सकते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, मिट्टी और कब्र की परिस्थितियों के आधार पर यह अवधि काफी बदलती है। प्राकृतिक दफन में रसायनों से बचते हुए शरीर को जैविक रूप से अपघटित होने वाली सामग्री के साथ मिट्टी में लौटाया जाता है।

टेरामेशन के समर्थक इसे कब्रिस्तानों में जगह की कमी और पर्यावरणीय चिंताओं के बीच एक विकल्प मानते हैं। अमेरिका के 14 राज्यों में इसे अनुमति मिल चुकी है। वहां 2014 में कैटरीना स्पेड ने अर्बन डेथ प्रोजेक्ट शुरू किया था।

ऑस्ट्रेलिया में न्यू साउथ वेल्स के कानून ने भी इसके लिए रास्ता खोला है, लेकिन विशेष सुविधाएं और जरूरी नियम विकसित होने बाकी हैं। वहां इसकी शुरुआत 2029 से पहले होने की उम्मीद नहीं है।