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जेनेवा, एएनआइ। गिलगित-बाल्टिस्तान के एक्टिविस्ट सेंगे सेरिंग ने कहा कि पाकिस्तान Article 370 को निरस्त करने के भारत के फैसले पर रोष जता रहा है, लेकिन इस मामले में उसका कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर में कुछ लोगों के हाथों में एक ऐसा उपकरण बन गया था जिसने उन्हें अन्य जातीय और धार्मिक समूहों पर वीटो पावर दे रखा था। जिन लोगों को इससे फायदा हो रहा था, वे पाकिस्तानी सेना के सहयोगी बन गए और जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के रणनीतिक हितों को बढ़ावा देने लगे।

इस दौरान सेरिंग ने यह भी कहा कि एक तरफ गिलगित-बाल्टिस्तान, लद्दाख, जम्मू के लोग इस स्थिति के विकसित होने का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, पाकिस्तान और कश्मीर में कुछ लोग ऐसी ही स्थिति को बनाए रखना चाहते थे। जहां वह इस स्पेशल दर्जे का फायदा उठा सकें और आतंकवादी समूह का उपयोग कर अपनी सौदेबाजी शक्ति को बढ़ा सकें। अब जब यह अनुच्छेद समाप्त हो गया है, तो छोटे धार्मिक समूह खुश हैं।

गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा
यूएनएचआरसी के 42वें सत्र में गिलगित-बाल्टिस्तान एक्टिविस्ट सेंगे सेरिंग ने कहा, 'गिलगित-बाल्टिस्तान भारत का हिस्सा है। संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों को यह पता होना चाहिए कि पाकिस्तान यहां पिछले 70 सालों से रोड़ा बना हुआ है।'

जम्मू-कश्मीर कैसे है विवादित क्षेत्र
जेनेवा में चल रहे UNHRC के 42वें सत्र में गिलगित-बाल्टिस्तान से कर्नल (रिटायर्ड) वजाहत हसन ने कहा- 'पाकिस्तान का कहना है कि पूरा जम्मू-कश्मीर एक विवादित इलाका है, इसलिए वहां आत्मनिर्णय के अधिकार होने चाहिए, लेकिन मेरा कहना है कि पाकिस्तान यह कैसे दावा कर सकता है कि यह एक विवादित क्षेत्र है? साथ ही उन्होंने कहा- 'गिलगित-बाल्टिस्तान को कश्मीर के कॉकपिट में इतने लंबे समय तक रखा है कि लोग अब गिलगित-बाल्टिस्तान के महत्व और जम्मू-कश्मीर राज्य के साथ इसके लिंक के बारे में नहीं जानते हैं।

बता दें गिलगित-बाल्टिस्तान एक भारतीय क्षेत्र है, जिसपर पाकिस्तान ने जबरदस्ती कब्जा कर रखा है। गिलगित-बाल्टिस्तान में अक्सर पाकिस्तान से आजादी को लेकर नारे लगते रहते हैं। वहां के लोग आए दिन सड़कों पर पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करते नजर आते रहते हैं।

गुलाम कश्मीर(PoK) पर पाकिस्तान के दोहरे मापदंड हैं। एक तरफ वो यह आरोप लगाता है कि भारत को जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को रद्द नहीं करना चाहिए था, जबकि पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को लूटकर लोगों का बुनियादी हक छीनने का काम कर रहा है।

Posted By: Nitin Arora

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