फ्रांस में भड़की हिंसा के पीछे 54 अंतरराष्ट्रीय संगठनों का नेटवर्क, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
फॉक्स न्यूज डिजिटल की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों और हिंसा के पीछे 54 अंतरराष्ट्रीय संगठन सक्रिय हैं। ...और पढ़ें
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फ्रांस की हिंसा के पीछे 54 संगठनों का नेटवर्क (फोटो- रॉयटर्स)
HighLights
फॉक्स न्यूज रिपोर्ट ने 54 संगठनों का उल्लेख किया।
कम्युनिस्ट, समाजवादी, छात्र समूह प्रदर्शनों में शामिल।
भारतीय संगठन 'इंडियन एलायंस पेरिस' का भी जिक्र।
डिजिटल डेस्क, पेरिस। फ्रांस में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे समर्थन को लेकर फाक्स न्यूज डिजिटल की एक रिपोर्ट में 54 संगठनों और आंदोलनों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट का आरोप है कि कम्युनिस्ट, समाजवादी, मुस्लिम छात्र और फलस्तीन समर्थक संगठनों समेत कई समूहों ने प्रदर्शनों को बढ़ावा दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, इन 54 संगठनों में 16 छात्र या युवा समूह हैं। बाकी में वामपंथी राजनीतिक दल, मजदूर संघ, किसान संगठन, नागरिक अधिकार समूह और अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंच शामिल हैं। रिपोर्ट का दावा है कि इनमें से कुछ ने प्रदर्शनों में भाग लिया, जबकि अन्य ने इंटरनेट मीडिया या समाचार कवरेज के जरिए आंदोलन को समर्थन दिया।
फाक्स न्यूज के अनुसार, 28 कम्युनिस्ट और समाजवादी युवा संगठनों का गठबंधन 12 यूरोपीय देशों में समन्वित हड़ताल के लिए युवाओं को लामबंद कर रहा है। अभियान का नारा है- हमारे भविष्य के लिए लड़ो, उनके युद्धों के लिए नहीं।
भारत से जुड़े संगठन का भी जिक्र
रिपोर्ट में फ्रांस स्थित इंडियन एलायंस पेरिस का नाम भी शामिल है। आरोप है कि संगठन ने इंटरनेट मीडिया पर फ्रांस और भारत के युवा आंदोलनों के बीच समानताएं दिखाते हुए संदेश साझा किए। रिपोर्ट में न्यूयार्क स्थित मीडिया संस्थान ब्रेकथ्रू न्यूज का भी उल्लेख है, जिसने फ्रांस के विभिन्न शहरों में हुए प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई के दृश्य प्रसारित किए। इसके अलावा कोडपिंक का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में कम्युनिस्ट नेता और शिक्षाविद विजय प्रसाद के इंटरनेट मीडिया संदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें पेरिस, नई दिल्ली और ब्यूनस आयर्स के आंदोलनों का एक साथ उल्लेख था।
बता दें कि प्रसाद ट्राइकांटिनेंटल लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक हैं। यह गैर-लाभकारी संगठन शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मार्क्सवादी उद्योगपति नेविल राय सिंघम के वित्तपोषण से चलता है। रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस स्थित इस संगठन ने इंटरनेट मीडिया पर फ्रांस और भारत के प्रदर्शनों को जोड़ा और एक कार्यक्रम के लिए पीपुल्स फोरम के साथ साझेदारी की।
रिपोर्ट में फ्रांस की अशांति को ‘केओस इंक.’ नाम के व्यापक अंतरराष्ट्रीय आंदोलन का हिस्सा बताया गया है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नु ने वामपंथी दल ला फ्रांस इंसुमीज पर प्रदर्शनों का राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है। (समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)
