सिडनी, आइएएनएस। वैज्ञानिकों ने मोतियाबिंद का खतरा बढ़ाने वाले 40 नए जीन की पहचान की है। इस सफलता के बाद अंधेपन के प्रमुख कारणों में से एक इस बीमारी की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। ऑस्ट्रेलिया के क्यूआइएमआर बर्घोफर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट में हुए शोध के अनुसार अधिक जेनेटिक चिन्ह वाले व्यक्तियों में मोतियाबिंद का खतरा कम जीन वालों से छह गुना अधिक होता है।

इस बीमारी के कारण रेटिना की तंत्रिका को नुकसान पहुंचता है और धीरे-धीरे व्यक्ति की देखने की क्षमता घटने लगती है। 2013 में 6.43 करोड़ लोग इस बीमारी से ग्रसित थे। 2040 तक इनकी संख्या 11.18 करोड़ तक होने का अनुमान है। सही समय पर इसकी पहचान हो जाए तो दवाइयों और ऑपरेशन से इसका इलाज किया जा सकता है।

हालांकि, इस बीमारी के खतरे की पहचान के लिए अब तक कोई तकनीक विकसित नहीं हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि जीन की पहचान होने से हम पहले ही बीमारी का पता लगा पाएंगे। इससे उनका सही समय पर इलाज कर अंधेपन से बचाव किया जा सकेगा। जीन की पहचान करने के लिए 134,000 लोगों पर शोध किया गया था।

Posted By: Ravindra Pratap Sing

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