मुजफ्फराबाद, एजेंसियां। संविधान में संशोधन के खिलाफ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चल रहे विरोध पर हालिया अपडेट में, गुलाम कश्मीर (पीओके) के पूर्व प्रधानमंत्री, फारूक हैदर ने कहा कि "संशोधन पारित करने के लिए सभी व्यवस्थाएं और गुलाम कश्मीर(पीओके) को एक प्रांत बनाने को अंतिम रूप दिया गया है, और केवल एक मजबूत विरोध ही क्षेत्र को पाकिस्तान का हिस्सा बनने से बचा सकता है।"

कब्जे वाले क्षेत्र की संवैधानिक स्थिति को ठीक करने के लिए 15 वें संशोधन में पाकिस्तान सरकार की योजना के खिलाफ मुजफ्फराबाद और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अन्य शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने अपना गुस्सा के दिखाने के लिए टायर जलाए और हाईवे जाम कर दिया। उन्होंने पाकिस्तान में शामिल होने के खिलाफ, संविधान संशोधन के खिलाफ नारे लगाए और पाकिस्तान से आजादी की मांग की।

गुलाम कश्मीर एक स्वशासित क्षेत्र है

बता दें पीओके एक स्वशासित क्षेत्र है जिसमें एक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और आधिकारिक ध्वज होता है, लेकिन यह इस्लामाबाद द्वारा कश्मीर मामलों के संघीय मंत्रालय और एक निर्वाचित निकाय, कश्मीर परिषद के माध्यम से नियंत्रित होता है, जिसकी अध्यक्षता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री करते हैं। सरकार के इस कदम से क्षेत्र के सभी 10 जिलों के नागरिक आक्रोशित हैं। इन विरोध प्रदर्शनों ने पीओके के अन्य इलाकों जैसे रावलकोट, बाग, पुंछ, मुजफ्फराबाद और नीलम घाटी में हालात बदतर कर दिए हैं।

कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा को आंशिक रूप से किया गया बंद

डेली सिख के लिए लिखते हुए हरजाप सिंह ने कहा कि 1 जुलाई से क्षेत्र में महिलाएं और बच्चे कई दिनों से सड़कों पर बैठकर आजादी के नारे लगा रहे हैं और सेना को बैरक में वापस करने की मांग कर रहे हैं। 13वें संशोधन के लागू होने से पहले से ही नागरिकों ने पाकिस्तानी सरकार के अंगूठे के नीचे रहने की पीड़ा को जाना है। उन्हें जीने में सम्मान से वंचित रखा गया है। उन्होंने कहा कि पुंछ का इलाका कर्फ्यू जैसी स्थिति का सामना कर रहा है और कुछ इलाकों में इंटरनेट सेवा आंशिक रूप से बंद है। टायर जलने के कारण सभी प्रकार के वाहनों के लिए सड़कें बंद हैं और पाकिस्तान के मुख्यधारा के मीडिया को इन दृश्यों को कवर करने की मनाही है।

हरजाप सिंह ने लिखा, 'पुंछ के खैगाला इलाके में विरोध प्रदर्शनों को बल प्रयोग और अंधाधुंध खुली गोलीबारी से शांत किया गया। घायल प्रदर्शनकारियों को चिकित्सा सहायता से वंचित कर दिया गया, जबकि कुछ लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने मरने वालों की संख्या का खुलासा नहीं किया। पाकिस्तान सरकार ने जून 2018 में 13वां संशोधन पेश किया, जिसने गुलाम कश्मीर (पीओके) को कारपोरेट टैक्स को छोड़कर कानून बनाने और टैक्स जमा करने सहित वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दों को नियंत्रित करने का अधिकार दिया।

राज्य शब्द को आजाद जम्मू कश्मीर से बदलने की तैयारी

हालांकि, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, मुख्य चुनाव आयुक्त और आपातकालीन प्रावधानों को चुनने की शक्ति देश के प्रधानमंत्री के हाथों में रही। एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 15वें संशोधन के प्रस्तावित मसौदे में सामने आए विवरण से पता चलता है कि 'राज्य' शब्द को 'आजाद जम्मू कश्मीर' से बदल दिया जाएगा और संयुक्त राष्ट्र के उल्लेख को 'विषय के अधीन' शब्दों से बदल दिया जाएगा।

सभी वित्तीय शक्तियां गुलाम कश्मीर (पीओके) की सरकार से पाकिस्तान को हस्तांतरित कर दी जाएंगी और इस प्रकार पीओके को एक प्रांतीय इकाई के स्तर पर व्यावहारिक रूप से नीचा दिखाया जाएगा। पिछले 75 वर्षों में इस क्षेत्र की संवैधानिक स्थिति का निर्धारण करने के लिए पाकिस्तान सरकार का यह 24वां प्रयास होगा। हालांकि, इस संशोधन को पीओके की पहचान को कमजोर करने की साजिश करार देने वाले लोगों के लंबे प्रतिरोध ने समय के साथ पाकिस्तान सरकार की योजनाओं को विफल कर दिया है।

Edited By: Shashank Shekhar Mishra