काबुल, एजेंसी। अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अफगानिस्तान में तालिबान के सत्‍ता में बैठे एक साल पूरे हो गए हैं। अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सैनिकों के गलत तरीके से वापसी के एक साल बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की क्षमता पर भारी सवाल उठाया गया है। वाशिंगटन एक्जामिनर की रिपोर्ट के अनुसार, उसके बाद अफगानिस्तान पर तालिबान के क्रूर शासन थोपने से लोगों के सबसे बुनियादी मानवाधिकारों का बड़े पैमाने पर हनन हो रहा है।

हडसन इंस्टीट्यूट के दक्षिण और मध्य एशिया के निदेशक हुसैन हक्कानी ने कहा कि अफगान धरती पर तालिबान के वापस आने के साथ देश में चरम आतंकवाद बढ़ गया है, जो समूह निष्क्रिय हो गए थे, वे अब फिर से सक्रिय हैं।

अमेरिकी सैनिकों की वापसी के एक साल बाद तालिबान ने सबसे बुनियादी मानवाधिकारों से इनकार करते हुए अफगानिस्तान के 3 करोड़ 90 लाख लोगों पर एक क्रूर इस्लामी तानाशाही लागू किया है। हक्कानी ने कहा कि काम या पढ़ाई के अधिकार से वंचित कर महिलाओं का उत्पीड़न सबसे भयावह है।

इसके अलावा अफगान वापसी के दूसरे क्रम के रिजल्‍ट ऐसे हैं कि रूस और चीन अब यह मान सकते हैं कि वे भी अपनी पूरी ताकत के साथ सैन्य अभियान चलाने की अमेरिका की इच्छा का टेस्‍ट कर सकते हैं।

वाशिंगटन परीक्षक ने बताया कि इसके अलावा अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की बुरी तरह से वापसी के परिणामों में न केवल अमेरिका के ओहदे में अंतरराष्ट्रीय स्थिति में गिरावट आई है, बल्कि इसने अपने सहयोगियों को यह सोचकर छोड़ दिया कि क्या अमेरिका उनकी रक्षा के बारे में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा या अफगानिस्तान के मामले की तरह उन्हें अपने दम पर छोड़ देगा।

हुसैन हक्कानी ने कहा कि यह रेखांकित करते हुए बताया कि अमेरिका इस मुद्दे से अधिक स्थायी तरीके से कैसे निपट सकता था। अमेरिकी प्रशासन को अफगान सरकार के साथ एक समझौते के माध्यम से सैनिकों को वापस लेना चाहिए था। खाड़ी में एक छोटी सी सेना को छोड़कर अफगान सेना को तालिबान को दूर रखने में मदद मिल सकती थी। हक्कानी ने कहा कि हालांकि, ट्रंप प्रशासन और बाइडन दोनों ने तालिबान के साथ गलत सौदा किया और अफगानों के लिए आपदा का कारण बना।

जब से तालिबान ने पिछले साल काबुल में सत्ता पर कब्जा किया था, अफगानिस्‍तान में मानवाधिकारों की स्थिति बिगड़ गई है। वहां अभूतपूर्व पैमाने के राष्ट्रव्यापी आर्थिक, वित्तीय और मानवीय संकट से बढ़ गई है। नागरिकों की लगातार हत्या, मस्जिदों और मंदिरों को नष्ट करने, महिलाओं पर हमला करने और क्षेत्र में आतंक को बढ़ावा देने से जुड़े मानवाधिकारों के निरंतर उल्लंघन के साथ आतंक, हत्या, विस्फोट और हमले एक नियमित मामला बन गया है। अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना की वापसी के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में राजनीतिक अनिश्चितता पैदा करने वाले बड़े पैमाने पर हिंसा शुरू हो गई है।

UNAMA के अनुसार, कम से कम 59 प्रतिशत आबादी को अब मानवीय सहायता की आवश्यकता है। 2021 की शुरुआत की तुलना में मौजूदा समय में 60 लाख लोगों की वृद्धि हुई है।

Edited By: Arun Kumar Singh