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पीओजेके में 53 लोगों की मौत के बाद भड़का आक्रोश, जनआंदोलन से घबराए जनरल मुनीर

Published: Sun, 14 Jun 2026 05:30 AM (IST)Updated: Sun, 14 Jun 2026 07:43 AM (IST)

गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की शह पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 53 लोगों की मौत के बाद जनाक्रोश लगातार बढ़ रहा है।

पीओजेके सरकार को हटाने की तैयारी में मुनीर, आंदोलन तेज (फोटो- एक्स)

पीओजेके सरकार को हटाने की तैयारी में मुनीर, आंदोलन तेज (फोटो- एक्स)

HighLights

  1. धारा 56 के जरिये सरकार बर्खास्त कर प्रत्यक्ष नियंत्रण की आशंका

  2. बढ़ते विरोध प्रदर्शनों से पाकिस्तान प्रशासन पर बढ़ा दबाव

आईएएनएस, नई दिल्ली। गुलाम जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की शह पर सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 53 लोगों की मौत के बाद जनाक्रोश लगातार बढ़ रहा है।

आंदोलन अब और तेज हो गया है

जम्मू-कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) के नेतृत्व में चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। हालांकि अधिकारियों ने बातचीत की पेशकश की है, लेकिन संगठन ने इसे महज औपचारिकता बताते हुए खारिज कर दिया है।

जेकेजेएएसी का कहना है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि अतीत में किए गए आश्वासनों पर कभी अमल नहीं हुआ।

भारतीय खुफिया अधिकारियों के अनुसार, इस्लामाबाद की बातचीत की पेशकश का उद्देश्य समाधान नहीं, बल्कि समय हासिल करना और अपनी शर्तें मनवाना है। उनका दावा है कि आसिम मुनीर का वास्तविक लक्ष्य पीओजेके पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करना है।

अधिकारियों के मुताबिक, इसके लिए पाकिस्तान 'आज़ाद जम्मू-कश्मीर अंतरिम संविधान अधिनियम, 1974' की धारा 56 लागू करने पर विचार कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो पीओजेके की निर्वाचित सरकार को बर्खास्त किया जा सकेगा और विधानसभा भी भंग की जा सकेगी। इस स्थिति में स्थानीय सरकार की भूमिका लगभग समाप्त हो जाएगी और सभी महत्वपूर्ण निर्णय सीधे इस्लामाबाद से लिए जाएंगे।

पीओजेके एक स्व-शासित क्षेत्र

वर्तमान व्यवस्था के तहत पीओजेके एक स्व-शासित क्षेत्र है। पाकिस्तान का नियंत्रण केवल विदेश नीति, रक्षा, सुरक्षा, मुद्रा और विदेशी व्यापार जैसे विषयों तक सीमित है, जबकि दैनिक प्रशासन और स्थानीय शासन क्षेत्रीय सरकार के हाथ में है।

अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की कोशिश पीओजेके की स्वायत्तता को सीमित कर विरोध प्रदर्शनों को दबाने की है। उनका दावा है कि उद्देश्य क्षेत्र का विलय नहीं, बल्कि विकास और अधिकारों की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों की आवाज को नियंत्रित करना है।

विदेशों तक पहुंचा विरोध

सूत्रों के अनुसार, इस बार विरोध प्रदर्शन केवल मुजफ्फराबाद तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे पीओजेके में फैल चुके हैं। विदेशों में रह रहे पीओजेके मूल के लोग भी मानवाधिकार उल्लंघनों का मुद्दा उठा रहे हैं। इससे पाकिस्तान प्रशासन पर दबाव बढ़ा है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए हालात संभालना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।

आंदोलन की खबरें दबाने के आरोप

पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शनों की खबरों को दबाने के आरोप भी पाकिस्तान पर लग रहे हैं। बताया गया है कि क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं भी बाधित की गई हैं। इसी क्रम में यूट्यूब चैनल चलानेवाले पत्रकार सोहराब बरकत को हिरासत में लिए जाने के बाद विरोध तेज हो गया है।

पत्रकारों की सुरक्षा के लिए काम करने वाले संगठन कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है।