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हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब पर किया हमला, दो इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दागी मिसाइलें

Published: Tue, 06 Oct 2026 03:31 PM (IST)Updated: Tue, 06 Oct 2026 03:33 PM (IST)

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जजान और नजरान हवाई अड्डों पर हमला किया, जिसमें तीन लोग घायल हुए और सीमित नुकसान हुआ।

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर किया हमला(फोटो: रॉयटर्स)

यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर किया हमला(फोटो: रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, रियाद। सऊदी अरब के जजान और नजरान स्थित हवाई अड्डों को सोमवार शाम दो अलग-अलग हमलों में निशाना बनाया गया। सऊदी विमानन प्राधिकरण के अनुसार, इन हमलों में तीन लोग घायल हुए हैं और सीमित नुकसान पहुंचा है। यह हमला यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच हुआ है।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब सऊदी समर्थित यमन सरकार की सेना ने लाल सागर तट के साथ हूती विद्रोहियों से अपने इलाके वापस लेने के लिए बड़ा सैन्य अभियान तेज कर दिया है। सऊदी अरब ने इस अभियान के समर्थन में हवाई हमलों को काफी तेज किया है।

इसके जवाब में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं।

सरकारी बलों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के पास के इलाकों पर दोबारा कब्जा करने के बाद मोचा की ओर कदम बढ़ाए हैं, जिससे हूती विद्रोहियों पर दबाव काफी बढ़ गया है।

हवाई अड्डों पर नुकसान का आकलन

सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने बताया कि वह किंग अब्दुल्ला बिन अब्दुलअजीज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नजरान अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हुए नुकसान का आकलन कर रहा है।

प्राधिकरण ने कहा कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा देश की नागरिक उड्डयन प्रणाली की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, राबिघ में अरामको की तेल रिफाइनरी, आभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और खमीस मुशायत स्थित एक सैन्य अड्डे पर भी हमले किए हैं।

इन हमलों से सऊदी-हूती संघर्ष और गहरा गया है, जिसका असर अब यमन की सीमाओं से बाहर निकलकर सऊदी अरब के आर्थिक और सैन्य बुनियादी ढांचे पर साफ दिखाई दे रहा है।

संघर्ष के इस तरह तेज होने के बाद मक्का रक्षा समझौते के तहत हलचल बढ़ गई है, जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये अपने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

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