प्रथम विश्व युद्ध से क्यों हो रही अमेरिका-ईरान शांति समझौते की तुलना, क्या 'वर्साय 2 संधि' पश्चिम एशिया में रचेगी नया इतिहास?
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय शांति समझौते को 'वर्साय 2 संधि' कहा जा रहा है, जिस पर ...और पढ़ें
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अमेरिका-ईरान शांति समझौते को कहा जा रहा 'वर्साय 2 संधि'
HighLights
अमेरिका-ईरान ने फ्रांस में 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते को 'वर्साय 2 संधि' कहा जा रहा, तुलना 1919 संधि से।
विशेषज्ञों को पश्चिम एशिया में अप्रत्याशित परिणामों की आशंका।
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को 'वर्साय 2 संधि' माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने फ्रांस के ऐतिहासिक वर्साय के महल में 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
इसी महल में 1919 में प्रथम विश्व युद्ध समाप्त करने वाली वर्साय संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। कई विशेषज्ञों और आलोचकों का मानना है कि इस समझौते में अमेरिका ने ईरान के सामने अपेक्षा से अधिक रियायतें दी हैं।
1919 की वर्साय संधि अपनी कठोर शर्तों और प्रतिकूल परिणामों के लिए जानी जाती है। इतिहासकार मानते हैं कि इसने द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि तैयार की थी।
ठीक उसी तरह, अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि ईरान- अमेरिका समझौते से भी भविष्य में पश्चिम एशिया में अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं। आइए प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने वाली 'वर्साय की संधि' के बारे में जानने का प्रयास करते हैं।
जर्मनी पर थोपी गई थी वर्साय की संधि
वर्साय की संधि ने प्रथम विश्व युद्ध को आधिकारिक रूप से समाप्त कर दिया। यह मुख्य रूप से मित्र राष्ट्रों (अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन) द्वारा पराजित जर्मनी पर थोपी गई अपमानजनक और कठोर संधि थी।
इस संधि की शर्तें तैयार करने में जर्मनी की कोई भूमिका नहीं थी, जर्मनी को सिर्फ इस पर हस्ताक्षर करने की भूमिका मिली थी। अत: जर्मनवासी इसे थोपी हुई मानते थे।
इसकी वजह से जर्मनी को अपनी भूमि के एक बड़े हिस्से से हाथ धोना पड़ा, दूसरे राज्यों पर कब्जा करने की पाबंदी लगा दी गई, उनकी सेना का आकार सीमित कर दिया गया।
इस कारण एडोल्फ हिटलर और अन्य जर्मन लोग इसे अपमानजनक मानते थे और इस तरह से यह संधि द्वितीय विश्वयुद्ध के कारणों में से एक थी।
यह संधि शांति स्थापना के उद्देश्य से कहीं अधिक विजेता राष्ट्रों के अपने स्वार्थों की पूर्ति और अपनी पुरानी शत्रुता का प्रतिशोध लेने के उद्देश्य से प्रेरित थी।
वर्ष 1919 में जर्मनी असहाय था, अत: उसने वर्साय की कठोर संधि को मजबूरी में स्वीकार कर लिया, लेकिन हिटलर ने इस संधि का जर्मनी की सत्ता पर काबिज होने के लिए इस्तेमाल किया और राष्ट्रवाद के बहाने तानाशाह बना और जर्मनों के मन में बदले की भावना पैदा की।
वर्साय की संधि के तहत जर्मनी से छीने गए क्षेत्रों (विशेष रूप से पोलैंड में) को वापस लेने की महत्वाकांक्षा के कारण, 1 सितंबर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पर आक्रमण कर दिया। यह घटना द्वितीय विश्व युद्ध के आरंभ का मुख्य कारण बनी।
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