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ईरान के लिए क्यों महत्वपूर्ण है खर्ग द्वीप और अमेरिका ने इसे निशाना क्यों बनाया? पढ़ें Inside Story

Published: Sat, 14 Mar 2026 10:11 AM (IST)Updated: Sat, 14 Mar 2026 11:14 AM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की कि अमेरिकी सेना ने ईरान के खर्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों को तबाह कर ...और पढ़ें

HighLights

  1. अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप के सैन्य ठिकाने तबाह किए।

  2. खर्ग द्वीप ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र।

  3. हमला ईरान की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के "सबसे कीमती गहने" कहे जाने वाले खर्ग द्वीप (Kharg Island) पर मौजूद ठिकानों को "पूरी तरह तबाह" कर दिया है और चेतावनी दी कि इस द्वीप पर मौजूद तेल की सुविधाएं अगला निशाना बन सकती हैं।

यह द्वीप ईरान के तेल नेटवर्क में एक अहम भूमिका निभाता है, क्योंकि यहां वह मुख्य टर्मिनल मौजूद है जो देश के तेल निर्यात का प्रबंधन करता है। इस हमले में खर्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, लेकिन वहां मौजूद ऊर्जा संयंत्रों को छोड़ दिया गया। यह ईरान के लिए एक चेतावनी है और यह संकेत भी कि अमेरिका देश के ऊर्जा बुनियादी ढांचे के कुछ हिस्सों पर हमला करने के लिए तैयार हो सकता है। आइए समझते हैं खर्ग द्वीप क्यों है इतना अहम?

कहां है खर्ग द्वीप?

खर्ग, ईरान के तट से 16 मील (26 किमी) की दूरी पर होर्मुज स्ट्रेट से लगभग 300 मील (483 किमी) उत्तर-पश्चिम में स्थित है। यह ईरान के 90% तेल शिपमेंट के लिए निर्यात टर्मिनल के रूप में काम करता है।

PM Modi Attack On Congress Over Middle East (1)

तेल का खेल

ईरान ने कच्चे तेल की सप्लाई को जारी रखा हुआ है, जबकि खाड़ी के अन्य देशों ने हमलों के डर की वजह से तेल की सप्लाई पर रोक लगा दी। TankerTrackers.com ने जिन सैटेलाइट तस्वीरों की जांच की है, उसके मुताबिक बुधवार को खर्ग द्वीप पर कई बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकरों को तेल भरते हुए देखा गया।

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ईरान ने 28 फरवरी (इसी दिन अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर स्ट्राइक की) से लेकर बुधवार तक हर दिन 1.1 मिलियन से 1.5 मिलियन बैरल के बीच तेल का निर्यात किया।

खर्ग द्वीप ईरान के लिए क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

खर्ग का रणनीतिक महत्व कोई नई बात नहीं है। 1984 के सीआईए के एक डीक्लासिफाइड नोट में इस द्वीप की तेल सुविधाओं को ईरान की पेट्रोलियम प्रणाली का सबसे अहम हिस्सा बताया गया था। यह देश की अर्थव्यवस्था और इराक के खिलाफ अमेरिकी युद्ध अभियान के लिए बेहद जरूरी था।

  • इस द्वीप पर तेल भंडारण की पर्याप्त क्षमता है।
  • द्वीप से जुड़ी पाइपलाइनें समुद्र के रास्ते ईरान के कई सबसे बड़े तेल और गैस क्षेत्रों से भी जुड़ी हुई हैं।
  • कच्चा तेल तीन बड़े क्षेत्रों अबूजर, फोरूजान और दोरूद से टर्मिनल तक पहुंचता है।
  • ईरानी पेट्रोलियम मंत्रालय का हवाला देते हुए अल जजीरा ने बताया कि वहां से यह एक पानी के नीचे बिछी पाइपलाइन सिस्टम के जरिए जमीन पर स्थित प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचता है और यहां इसे या तो भंडारित किया जाता है या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेज दिया जाता है।
  • यहां ईरानी तेल मंत्रालय द्वारा संचालित तीन प्रमुख ऊर्जा सुविधाएं भी स्थित हैं। इनमें से एक फलात ईरान ऑयल कंपनी है, जो प्रतिदिन 500,000 बैरल कच्चा तेल उत्पादित करती है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसे देश की चार मुख्य तेल उत्पादक रिफाइनरियों में सबसे बड़ी माना जाता है।
  • यह द्वीप खर्ग पेट्रोकेमिकल कंपनी का भी घर है। साथ ही यहां तेल और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस के भंडारण और निर्यात के लिए इस्तेमाल होने वाली एक विशाल सुविधा भी मौजूद है।
  • मई 2025 में S&P Global Commodity Insights ने बताया कि ईरान ने टैंक 25 और 26 की मरम्मत के बाद टर्मिनल की भंडारण क्षमता को 20 लाख बैरल तक बढ़ा दिया है। प्रत्येक टैंक में 10 लाख बैरल का भंडारण किया जा सकता है।

खर्ग पर हमला और ईरान के लिए मायने

ऊर्जा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि द्वीप पर नागरिक सुविधाओं पर कोई भी हमला या उस जगह पर कब्जा वैश्विक तेल की कीमतों को और भी ऊपर ले जा सकता है। सेंटर फॉर मैरीटाइम स्ट्रेटेजी के नौसेना विशेषज्ञ स्टीवन विल्स ने ब्लूमबर्ग को बताया कि इस द्वीप को ईरान के लगभग 90% तेल शिपमेंट को संभालने के लिए डिजाइन किया गया था।

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अगर इस द्वीप पर कब्जा कर लिया जाए या इसे नष्ट कर दिया जाए तो सैद्धांतिक रूप से ईरान की तेल निर्यात करने की एक बड़ी क्षमता खत्म हो सकती है और इसी से उसका गुजर-बसर होता है।

खर्ग द्वीप ईरान की सरकार और सेना को वित्तपोषित करने में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। अगर ईरान खर्ग पर अपना नियंत्रण खो देता है तो देश को अपना कामकाज चलाने में मुश्किल होगी।

इस द्वीप पर हमले के गंभीर आर्थिक परिणाम होंगे। 1960 और 1970 के दशक में ईरान के तेल विस्तार के दौरान खर्ग द्वीप पर बड़े पैमाने पर विकास हुआ, क्योंकि देश के तटवर्ती क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा इतना उथला था कि वहां सुपरटैंकरों को ठहराना संभव नहीं था।

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