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क्या होती है नौसैनिक नाकेबंदी, होर्मुज में कैसे करेगी काम? पढ़िए ईरान को घेरने का ट्रंप का मास्टरप्लान

Published: Tue, 14 Apr 2026 12:59 PM (IST)

अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में नौसैनिक नाकेबंदी लागू की है, जिसका उद्देश्य ईरान की अर्थव्यवस्था और तेल निर्यात को कमजोर ...और पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सोमवार को अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी सैन्य नाकेबंदी लागू कर दी है। पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान के बीच जारी शांति वार्ता विफल होने के बाद यह अमेरिका द्वारा उठाया गया बड़ा कदम है। ऐसे में अब सवाल यह है कि क्या होता है नौसैनिक नाकेबंदी और यह होर्मुज स्ट्रेट में कैसे कर रहा काम? आइए जानते हैं पूरी डिटेल...

दरअसल, नौसैनिक नाकेबंदी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत एक ऐसी सैन्य कार्रवाई है, जिसका उपयोग किसी देश के समुद्री रास्तों को पूरी तरह सील कर उसकी अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए किया जाता है।

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वर्तमान में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफल होर्मुज में की गई नौसैनिक नाकेबंदी का उद्देश्य सिर्फ जहाजों को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरान के सबसे बड़े राजस्व स्रोत तेल निर्यात पर सीधा प्रहार है।

अमेरिका ने क्यों शुरू की नाकेबंदी?

दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है। यही वजह है कि मिडिल ईस्ट में जब युद्ध शुरू हुआ तो वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मच गया। चूकिं ईरान होर्मुज पर अपना नियत्रण रखा है, ऐसे में इस जलमार्ग से जाने वाले जहाजों से अवैध वसूली भी कर रहा है।

ईरान का कहना है कि वह होर्मजु से जाने वाले जहाजों से वसूली हमेशा के लिए करेगा, जिसका अमेरिका विरोध कर रहा है। ईरान द्वारा की जा रही अवैध वसूली को रोकने और होर्मुज को फिर से पहले की तरह खोलने के लिए अमेरिका द्वारा वहां नाकेबंदी शुरू की गई है।

अमेरिका किन जहाजों को नहीं देगा सुरक्षित मार्ग?

अमेरिका का कहना है कि कहीं और से आने या जाने वाले जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरने वाले जहाजों को जाने की अनुमति दी जाएगी। लेकिन उन जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग नहीं उपलब्ध कराया जाएगा, जो ईरान को अवैध टोल दे रहे हैं।

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नाकेबंदी को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "मैंने अपनी नौसेना को यह भी निर्देश दिया है कि वह अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मौजूद हर उस जहाज को खोजे और रोके, जिसने ईरान को कोई टोल (शुल्क) दिया है। जो कोई भी गैर-कानूनी टोल देगा, उसे खुले समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा।"

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका उन बारूदी सुरंगों को भी नष्ट करना शुरू कर देगा, जिसे ईरान ने होर्मुज में बिछाई है। साथ ही चेतावनी दी है कि कोई भी ईरानी जो हम पर, या शांतिपूर्ण जहाज़ों पर गोली चलाएगा, उसे पूरी तरह से तबाह कर दिया जाएगा।

कैसे काम करती है नाकेबंदी?

नाकाबंदी का मतलब सभी देशों चाहे वे दुश्मन हों या दोस्त उनके जहाजों और/या विमानों को किसी दुश्मन देश के कब्जे वाले या उसके नियंत्रण वाले खास बंदरगाहों, हवाई अड्डों या तटीय इलाकों में आने या जाने से रोकना होता है। नाकेबंदी वाले इलाके में बिना इजाजत के आने या जाने वाले किसी भी जहाज को रोका जा सकता है, उसका रास्ता बदला जा सकता है, या फिर उसे कब्जे में लिया जा सकता है।

हालांकि, मानवीय सहायता वाली जहाजों- जिसमें भोजन, चिकित्सा सामग्री और अन्य जरूरी सामान शामिल हैं- उनके गुजरने की इजाजत दी जाती है, लेकिन उनकी जांच की जाती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फाक्स न्यूज को बताया कि NATO ने होर्मुज को सुरक्षित करने की पेशकश की है। बहुत जल्द इसका इस्तेमाल आजादी से किया जा सकता। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका माइनस्वीपर (बारूदी सुरंग हटाने वाले जहाज) भेजेगा, और NATO का सदस्य UK भी ऐसा ही करेगा।

क्या होगा इसका असर?

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, नाकेबंदी से समुद्री कानून का उल्लंघन हो सकता है। स्ट्रेट को बंद करके ट्रंप ईरानी सरकार के लिए रेवेन्यू का एक बड़ा सोर्स काट सकते हैं। हालांकि, इससे तेल और गैस की कीमतें और भी अधिक बढ़ने का खतरा हो सकता है। एक एनालिस्ट्स ने कहा कि अमेरिका द्वारा होर्मुज में नाकेबंदी का मकसद ईरान पर अमेरिकी शर्तों पर डील करने का प्रेशर बनाना है।

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