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Lucas v/s Shahed: ईरान की ड्रोन तकनीक से उसी पर वार, युद्ध में अमेरिका की नई चाल से दुनिया में हड़कंप

Published: Thu, 05 Mar 2026 05:17 PM (IST)Updated: Thu, 05 Mar 2026 07:14 PM (IST)

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ युद्ध में लूकस ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है, जो ईरान के ही शहीद ड्रोन ...और पढ़ें

HighLights

  1. अमेरिका ने ईरान के शहीद ड्रोन की तकनीक पर लुकस बनाए।

  2. लुकस ड्रोन कम लागत में दुश्मन के रडार को भ्रमित करते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के युद्ध का आज छठा दिन है। ईरान लगातार ही इजरायल के साथ खाड़ी में स्थित अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है।

इस बीच एक चौंकाने वाली बात सामने आई है कि अमेरिका ने ईरान पर हमले में जिस लो-कॉस्ट अनक्रूड कॉम्बैट अटैक सिस्टम (लूकस) ड्रोन का इस्तेमाल शुरू किया है, वह तकनीक काफी हद तक ईरान के शहीद (Shahed) जैसे आत्मघाती ड्रोन से मिलती-जुलती है।

ईरान ने 1980 के दशक से सस्ते और आत्मघाती ड्रोन तकनीक पर काम शुरू किया था। बाद में इन्हीं ड्रोन का इस्तेमाल उसके सहयोगी समूहों और रूस ने भी किया। अब अमेरिका ने इसी मॉडल को रिवर्स इंजीनियरिंग के जरिए अपने सैन्य ढांचे में शामिल कर लिया है।

शहीद ड्रोन की खासियत

ईरान के शहीद-131 और शहीद-136 ड्रोन कम लागत वाले हैं, लेकिन लंबी दूरी तक मार करने वाले 'लोइटरिंग म्यूनिशन' हैं। ये ड्रोन लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर घंटों तक मंडरा सकते हैं और फिर सीधे टारगेट पर गिरकर विस्फोट करते हैं। 2019 में सऊदी अरब की एक तेल रिफाइनरी पर हुए हमले में इनका पहली बार बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ था।

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  • लंबाई: लगभग 3.5 मीटर
  • विस्फोटक क्षमता: 40–50 किलोग्राम
  • रफ्तार: लगभग 115 मील प्रति घंटा
  • दूरी: 1000 मील से अधिक

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रूस-यूक्रेन युद्ध से मिला सबक

ईरान के ये ड्रोन बाद में यमन के हूती विद्रोहियों और रूस द्वारा यूक्रेन युद्ध में भी इस्तेमाल किए गए। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने ईरान पर रूस को ड्रोन और तकनीक देने का आरोप लगाते हुए उसे 'पुतिन का सहयोगी' तक कहा था।

युद्ध में इन ड्रोन की सफलता ने अमेरिका को भी प्रभावित किया। इसके बाद अमेरिकी सेना ने कई Shahed-136 ड्रोन हासिल कर उनकी तकनीकी जांच की और उन्हें रिवर्स इंजीनियरिंग से दोबारा तैयार किया।

लूकस (Lucas) ड्रोन की खासियत

अमेरिका ने इस तकनीक के आधार पर Lucas ड्रोन विकसित किया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने 28 फरवरी को पुष्टि की कि इन ड्रोन का पहली बार युद्ध में इस्तेमाल किया गया था। अगर बड़ी संख्या में Lucas ड्रोन छोड़े जाएं तो वे दुश्मन के रडार सिस्टम को भ्रमित कर सकते हैं। इससे महंगे अमेरिकी या इजरायली हथियारों के लिए सुरक्षित रास्ता बन सकता है, जिससे बंकर या परमाणु ठिकानों जैसे कड़े लक्ष्यों पर हमला किया जा सके।

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  • अनुमानित लागत: लगभग 35,000 डॉलर
  • समुद्र से भी लॉन्च करने की क्षमता
  • हाई कैमरा सिस्टम
  • सैटेलाइट कनेक्टिविटी
  • उड़ान के दौरान लक्ष्य बदलने की क्षमता

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ड्रोन डोमिनेंस रणनीति

अमेरिका अब 'ड्रोन डोमिनेंस' रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत 2028 तक लगभग 3.4 लाख सस्ते हमलावर ड्रोन तैयार करने की योजना है। इस रणनीति का मकसद महंगे लड़ाकू विमानों पर निर्भरता कम करना और बड़ी संख्या में सस्ते ड्रोन से दुश्मन की एयर डिफेंस प्रणाली को मात देना है।

आधुनिक युद्ध का बदलता गणित

विशेषज्ञों के अनुसार, अब युद्ध की रणनीति 'तेज और महंगे हथियार' से बदलकर 'सस्ते और घातक हथियार' की ओर जा रही है।

AI आधारित ड्रोन

विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में ये ड्रोन AI आधारित रणनीति में भी काम कर सकते हैं, जिसमें कई ड्रोन एक टीम की तरह समन्वित हमला करते हैं। हालांकि, फिलहाल अमेरिका के पास पूरी तरह AI संचालित वायु सेना की तकनीक और कानूनी ढांचा नहीं है, लेकिन रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह भविष्य ज्यादा दूर नहीं है।

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