ईरान में 110 साल पुरानी गलती करने जा रहा अमेरिका, ट्रंप का खार्ग प्लान कैसे हो सकता है फेल?
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का खार्ग द्वीप पर कब्जा करने का प्लान खतरनाक हो सकता है। अगर अमेरिका ऐसा करता है ...और पढ़ें
HighLights
ट्रंप का खार्ग द्वीप प्लान ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ने का लक्ष्य
विशेषज्ञों ने 1915 की गैलीपोली सैन्य भूल से की तुलना
ईरान की समुद्री खदानें, भूगोल अमेरिकी सैनिकों के लिए खतरा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का टारगेट खार्ग द्वीप है। इसके लिए 2,200 अमेरिकी मरीन कमांडोज पश्चमि एशिया में भेजा जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह सैन्य दांव-पेच अमेरिकी सैनिकों की जान को खतरे में डाल सकता है और फिर भी युद्ध को समाप्त नहीं हो सकता है।
दरअसल, खार्ग द्वीप को ईरान का जीवनरेखा माना जाता है। जहां से ईरान का लगभग 90% तेल एक्सपोर्ट होता है। ट्रंप की योजना इस द्वीप पर कब्जा कर ईरान की आर्थिक रीढ़ तोड़ने की है। लेकिन यह भूल अमेरिका की ओवर-कॉन्फिडेंस को मुश्किल में डाल सकती है।
1915 में ब्रटेन ने की थी भूल
क्योंकि, आज से 110 साल पहले 1915 में ऐसा ही ओवर-कॉन्फिडेंस ब्रिटेन को था और विंस्टन चर्चिल ने ऑटोमन साम्राज्य (तुर्की) को ऐसे की कमजोर समझने की कोशिश की थी और गैलीपोली के तट पर ब्रिटिश सेना को उतार दिया, तुर्की की सेना पहाड़ियों पर बैठी थी।
जिसने ब्रिटेन की सेना को ऊंची पहाड़ियों से घेर लिया और इसका नतीजा यह हुआ कि कुछ सस्ती और छोटी 'सी-माइन्स' ने एक ही दिन में ब्रिटेन के कई बड़े जहाज डुबोए थे। इस दौरान तुर्की सेना ने ब्रिट्रेन सेना को परास्त कर दिया था।
तुर्की जैसे ईरान की भौगोलिक स्थिति
ईरान के पास भी ऐसी ही सस्ती और घातक 'सी-माइन्स' और 'फास्ट-अटैक बोट्स' मौजूद हैं। यही नहीं ईरान का भूगोल भी तुर्की से मिलता-जुलता है। पूरे समुद्री तट पर खड़ी और ऊंची पहाड़ियां, 22 किमी चौड़ा हॉर्मुज स्ट्रेट की तरह ही तुर्की का डार्डानेल्स है, जो 1915 में 'डेथ ट्रैप' बना था।
अगर अमेरिकी सैनिक खार्ग में अपने सैनिक उतारते हैं तो...
अगर अमेरिकी सैनिक खार्ग तट पर उतरते हैं तो वह ईरानी सेना के लिए बहुत आसानी से टारगेट बन सकते हैं। अगर ईरानी सैनिक अमेरिका के एक या दो लैंडिंग जहाज भी डूबा दिए, तो पूरा ऑपरेशन फेल हो सकता है।
