ईरान-अमेरिका युद्ध: AI 'किल चेन' ने निगल ली ईरान के 123 मासूमों की जिंदगी, US से कहां हुई चूक?
अमेरिका-इजराइल के ईरान पर संयुक्त हमले के दौरान मिनाब शहर के एक स्कूल पर मिसाइल गिरी, जिसमें 123 बच्चों सहित 150 से अधिक लोग मारे गए।

HighLights
मिनाब स्कूल पर मिसाइल हमले में 123 बच्चों की मौत हुई
अमेरिकी AI प्रणाली 'मेवेन' की पुरानी जानकारी पर निर्भरता
संयुक्त राष्ट्र ने इस घटना को युद्ध अपराध करार दिया
डिजिटल डेस्क, तेहरान। 28 फरवरी को, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त युद्ध शुरू किया, तो दो टॉमहॉक मिसाइलें दक्षिणी ईरानी शहर मिनाब में 'शजराह तैय्यबेह एलिमेंट्री स्कूल' के परिसर में जा गिरीं।
इन धमाकों में कम से कम 123 बच्चों समेत 150 से ज्यादा लोग मारे गए। बाद में सामने आया स्कूल की दो मंजिला इमारत ऐसी जमीन पर बनी थी जो कभी एक सैन्य परिसर का हिस्सा हुआ करती थी।
ईरान ने इन हमलों के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि ये हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं। हालांकि डोनल्ड ट्रंप प्रशासन ने सार्वजनिक रूप से इस त्रासदी की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन ब्लूमबर्ग की जांच में पाया गया कि पेंटागन को पता है कि इस खूनी त्रासदी के पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर निर्भरता थी।
एक ऐसा सिस्टम जिसमें पुराने टारगेटिंग डेटा का इस्तेमाल किया जाता है और जिसमें इंसानी निगरानी की कमी है। बच्चों की मौत के लिहाज से, मिनाब की घटना 21वीं सदी में अमेरिकी सेना की टारगेटिंग से जुड़ी सबसे घातक चूक थी।

अमेरिका को थी स्कूल होने की जानकारी: रिपोर्ट
अमेरिका के दो दर्जन से ज्यादा मौजूदा और पूर्व अधिकारियों ने बताया कि पेंटागन के कुछ कर्मचारियों को कुछ ही घंटों में पता चल गया था कि आम नागरिकों के साथ हुई इस त्रासदी के लिए अमेरिकी सेना की ऐसी गलतियों की एक के बाद एक कड़ी जिम्मेदार थी, जिन्हें रोका जा सकता था।
फरवरी के आखिरी दिन थे जब ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर जबरदस्त हवाई हमले का आदेश दिया। अधिकारियों ने बताया कि हमले की जल्दबाजी के कारण टारगेट तय करने का समय बहुत कम पड़ गया।
इस वजह से, और साथ ही उस जगह के बारे में पुरानी जानकारी, आम नागरिकों की सुरक्षा करने वाली टीमों में कटौती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टेक्नोलॉजी पर बहुत ज्यादा निर्भरता के कारण जानलेवा गलती हुई।

हमले से पहले नहीं किया गया ह्युमन क्रॉसचेक
खबरों के मुताबिक, युद्ध के पहले 24 घंटों में अमेरिका ने ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया। मिनाब का स्कूल भी उनमें से एक था। इसे टारगेट लिस्ट में इसलिए शामिल किया गया था क्योंकि जिस जगह पर यह बना था, उसे अमेरिकी सेना ने कई सालों से 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) का ठिकाना माना हुआ था।
लेकिन जांच में शामिल अधिकारियों ने पाया कि इस बात के साफ सबूत थे कि उस जगह में बदलाव किए गए थे और वहां स्कूल बनाया गया था। जो सैटेलाइट तस्वीरों में साफ दिखता था और लगभग 10 साल पुराना था। उन्होंने माना कि वह जगह खुले तौर पर एक स्कूल के तौर पर चल रही थी।
कमर्शियल तौर पर उपलब्ध सैटेलाइट तस्वीरों से यह भी पता चला कि स्कूल की जगह को मिलिट्री बेस से अलग करने वाली दीवारें और एंट्री गेट 2017 तक बन चुके थे। 2018 की एक तस्वीर में चमकीले रंग की दीवारें, फुटबॉल का मैदान, असेंबली एरिया और बच्चों की एक्टिविटीज के लिए निशान दिखाई दिए।
रिपोर्ट के मुताबिक, हमले से कई साल पहले, 2019 में कुछ अमेरिकी इंटेलिजेंस एनालिस्ट्स ने वहां हुए बदलावों पर ध्यान दिया था। उन्होंने इन बदलावों के बारे में एक ऐसे सिस्टम में जानकारी दर्ज की थी जो मुख्य मिलिट्री इंटेलिजेंस डेटाबेस से जुड़ा नहीं था और उसी डेटाबेस का इस्तेमाल टारगेट तय करने के लिए किया जाता था।
टारगेट की पहचान करने के लिए इस्तेमाल होने वाले मुख्य डेटाबेस में मिनाब वाली जगह को IRGC का ठिकाना ही बताया जाता रहा। जून में 'न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि टारगेट तय करने वाले अधिकारियों ने सात साल पुरानी सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल किया था, जिनमें स्कूल नहीं दिख रहा था।
पेंटागन की जांच में शामिल अधिकारियों ने कहा कि वे इस बात की जांच कर रहे हैं कि उस जगह के क्लासिफिकेशन को अपडेट क्यों नहीं किया गया?

AI ने ले ईरानी स्कूल के 123 बच्चों की जान
इस हमले की निगरानी करने वाले US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अधिकारियों ने बताया कि कुछ कर्मचारी 'मेवन स्मार्ट सिस्टम' (Maven Smart System) में मौजूद AI पर बहुत ज्यादा निर्भर थे।
पैलांटिर टेक्नोलॉजीज (Palantir Technologies) द्वारा विकसित, AI-आधारित यह सिस्टम 150 से ज्यादा अलग-अलग डेटा इनपुट का इस्तेमाल करके जानकारी का एक व्यवस्थित सेट तैयार करता है। इससे कमांडरों को कठिन सैन्य अभियानों जैसे टारगेट तय करने से लेकर कमांड और कंट्रोल तक के बारे में फैसले लेने में मदद मिलती है।
ट्रंप के व्हाइट हाउस लौटने के बाद, जांच में पाया गया कि US रक्षा विभाग ने 'मेवन' पर काफी ज्यादा निर्भरता दिखाई और इसे US सैन्य तंत्र का एक अहम हिस्सा बना दिया है। खबरों के अनुसार, US सेना के कई पूर्व वरिष्ठ अधिकारी अब 'मेवन' की मूल कंपनी के लिए काम करते हैं और उनकी भूमिका सुरक्षित सैन्य माहौल में इस सॉफ्टवेयर को चालू हालत में बनाए रखना है।

अधिकारियों ने बताया कि कुछ सैन्य कर्मियों को उम्मीद थी कि AI-आधारित सिस्टम पुरानी जानकारी या संभावित टारगेट का आकलन करने के लिए इस्तेमाल की गई इंटेलिजेंस में गलतियों की पहचान करेगा और उन्हें चिह्नित करेगा। यह साफ नहीं है कि उन्हें ऐसी उम्मीदें क्यों थीं।
मिनाब की घटना के बाद, खबरों के अनुसार पैलांटिर ने अपनी क्षमताओं में बदलाव किया है ताकि 'मूल इंटेलिजेंस की दोबारा समीक्षा करके उन कारकों की पहचान की जा सके जो किसी टारगेट को अयोग्य ठहरा सकते हैं, और उन विसंगतियों व गलतियों को चिह्नित किया जा सके जिन्हें इंसानी समीक्षा में शायद नजरअंदाज़ कर दिया गया हो।'
क्या होता है 'किल चेन'?
युद्ध से पहले, अधिकारियों ने बताया कि सेना को ऐसे टारगेट की पहचान करने का काम सौंपा गया था, जिन पर हमला करके ईरान की सेना को तबाह किया जा सके, इससे पहले कि तेहरान कोई जवाबी कार्रवाई कर पाता। उ
नकी लिस्ट में सबसे ऊपर IRGC के नेवल डिवीजन से जुड़ी जगहें थीं, जिनका काम फारस की खाड़ी और होर्मु जलडमरूमध्य की रक्षा करना और कभी-कभी वहां रुकावट डालना है। बताया जाता है कि ऐसे टारगेट को मंजूरी देने के लिए अमेरिकी सेना जिस प्रक्रिया का इस्तेमाल करती है, उसे 'किल चेन' कहा जाता है।
आमतौर पर, इस प्रक्रिया में इंटेलिजेंस एनालिस्ट, इमेज स्पेशलिस्ट, टारगेट तय करने वाले, वकील, कमांडर और हथियार चलाने वाले लोगों की एक लंबी चेन शामिल होती थी। लेकिन आज, इन ऑपरेशन्स में फैसले लेने का काम 'मेवेन' (Maven) AI सॉफ्टवेयर करता है।
शुरुआती इंटेलिजेंस इनपुट से लेकर बाद के रिव्यू स्टेज तक। अधिकारियों ने बताया कि AI टूल ने उस काम को कुछ मिनटों में पूरा करने में मदद की, जिसमें पहले घंटों लगते थे।
मिनाब को लिस्ट में क्यों शामिल किया गया?
मिनाब शहर तेहरान से लगभग 800 मील दक्षिण में, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बसा है। लगभग 76,000 लोगों की आबादी वाले इस शहर में रिहायशी इलाकों के साथ-साथ सैन्य ठिकाने भी हैं। IRGC इस इलाके में कई मिसाइल, नौसेना और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं चलाता है। शजराह तैय्यबेह एलिमेंट्री स्कूल लगभग एक दशक पहले उस जमीन पर बनाया गया था रोपोल पहले IRGC की नौसेना इकाई का कब्जा था।
IRGC की इकाई के तौर पर गलत क्लासिफिकेशन के कारण, मिनाब स्कूल को अन्य संभावित लक्ष्यों के साथ 'मेवेन' (Maven) सिस्टम में डाला गया था। अधिकारियों ने बताया कि आखिर में यह उन लक्ष्यों में से एक के तौर पर सामने आया जिनकी सिफारिश पहले दिन ही हमले के लिए की गई थी। लेकिन फिर भी, समय रहते इंसानी दखल से इस त्रासदी को टाला जा सकता था।
अधिकारियों ने बताया कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन की नागरिकों को नुकसान से बचाने वाली ज्यादातर इकाइयों (CHM) को खत्म कर दिया है, उन्होंने कर्मचारियों की संख्या में लगभग 90 प्रतिशत की कटौती की, जिससे अब 20 से भी कम कर्मचारी बचे हैं। CENTCOM में, टीम के सदस्यों की संख्या 10 से घटाकर एक कर दी गई थी।
अधिकारियों ने बताया कि हमले से पहले किसी भी नागरिक-सुरक्षा विशेषज्ञ ने मिनाब साइट की समीक्षा नहीं की थी। ऐसी समीक्षा अनिवार्य नहीं थी, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे नागरिकों के हताहत होने का जोखिम कम हो सकता था।
जवाबदेही की कमी
हाल ही में UN की एक जांच में पाया गया कि इस बात को मानने के लिए ठोस आधार हैं कि मिनाब में हुआ हमला और उसी दिन ईरान में हुआ अमेरिका का एक और हमला, युद्ध अपराध की श्रेणी में आते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका 'यह पक्का करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने की अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा' कि स्कूल एक मिलिट्री टारगेट था। इसमें कहा गया कि यह नाकामी 'लापरवाही से कहीं ज्यादा' थी।
