विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

इस्लामाबाद वार्ता में क्यों नहीं निकला कोई हल? अमेरिका ने ईरान सामने रख दी थी ये शर्त

Published: Sun, 12 Apr 2026 05:45 PM (IST)

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे चली उच्च-स्तरीय बैठक बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। ईरानी ...और पढ़ें

अमेरिका-ईरान की हाई-लेवल मीटिंग का नहीं निकला कोई निष्कर्ष (फोटो-रॉयटर्स)

अमेरिका-ईरान की हाई-लेवल मीटिंग का नहीं निकला कोई निष्कर्ष (फोटो-रॉयटर्स)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच करीब 21 घंटे तक हाई-लेवल मीटिंग चली। लेकिन पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई यह बैठक विफल हो गई और बिना किसी फैसले के ही समाप्त हो गई।

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने इस शांति-वार्ता के बिना किसी नतीजे के खत्म होने पर कहा कि अमेरिका हमारा भरोसा जीतने में नाकाम रहा।

आखिर क्यों विफल रही शांति-वार्ता?

ईरान की तरफ से जहां मोहम्मद बाघेर गलीबाफ नेतृत्व कर रहे थे। वहीं अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मीटिंग में शामिल हुए थे। जेडी वेंस ने भी इस बात की पुष्टि की कि ये मीटिंग बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।

जेडी वेंस के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान पूरी तरह से यह बात माने कि वह न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। अमेरिकी उपराष्ट्रपति के मुताबिक इस मुद्दे पर ईरान की तरफ से पक्का आश्वासन नहीं मिला, इसी वजह से यह समझौता नहीं हो पाया।

'अमेरिका नहीं जीत पाया हमारा भरोसा'

ईरानी संसद में स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने अमेरिका के साथ हुई मीटिंग के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'अमेरिका हमारा भरोसा नहीं जीत पाया, इसलिए यह मीटिंग विफल हो गई।'

मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने आगे लिखा, 'बातचीत पूरी तरह असफल नहीं रही। अमेरिका अब ईरान के सिद्धातों को भी समझ चुका है और उसे ही अब यह तय करना है कि वह हमारा भरोसा हासिल कर सकता है या नहीं।'

गलीबाफ ने पोस्ट में आगे लिखा, 'हम अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को लेकर जल्दबाजी में नहीं हैं। ईरान कूटनीति को ही अपनी रक्षा का माध्यम समझता है और हम अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।'

Mohammad Bagher Ghalibaf (2)

गलीबाफ ने ईरानी लोगों का जताया आभार

गलीबाफ ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, ईरान 9 करोड़ लोगों का मजबूत देश है। मैं उन सभी वीर ईरानी लोगों का, जिन्होंने सर्वोच्च नेता की सलाह मानते हुए और सड़कों पर उतरकर अपने बच्चों का साथ दिया और अपने आशीर्वाद के साथ हमें इस राह पर आगे बढ़ाया। इसके लिए मैं उनका आभारी हूं।

यह भी पढ़ें- 'इजरायल पर हमला करना हमारा कर्तव्य', शांति वार्ता विफल होने पर बोले तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन

यह भी पढ़ें- होर्मुज की सफाई शुरू... युद्धपोत, ड्रोन और हेलिकॉप्टर तैनात; अमेरिका ने शुरू किया 'हाईटेक ऑपरेशन'