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होर्मुज पर 'अंडरग्राउंड वॉर': ईरान के गढ़ में अमेरिका ने कैसे किया हमला? अब समुद्र में होगा महायुद्ध

Published: Wed, 18 Mar 2026 08:21 PM (IST)Updated: Wed, 18 Mar 2026 08:31 PM (IST)

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर 5,000 पाउंड वजनी 'बंकर बस्टर' बमों से हमला किया।

अब समुद्र में होगा महायुद्ध

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऐसा सैन्य हमला किया है, जिसने आधुनिक युद्ध की दिशा साफ कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट के पास स्थित ईरान के गहरे भूमिगत मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाते हुए अमेरिकी सेना ने 5,000 पाउंड (करीब 2,267 किलोग्राम) वजनी 'डीप पेनिट्रेटर' यानी बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकाम) के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के तटीय इलाकों में मौजूद हार्डन्ड यानी बेहद मजबूत मिसाइल साइट्स को निशाना बनाया गया। इन ठिकानों पर तैनात एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी थीं।

US MISSLE

ईरान के भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर हमला

एक साथ कई मोर्चों पर भड़की आगअमेरिकी हमले के बीच क्षेत्र में हिंसा और तेज हो गई है। इजरायल के मध्य क्षेत्र में बैलिस्टिक मिसाइल हमले में एक पुरुष और एक महिला की मौत हो गई, जबकि बेनी ब्राक में मिसाइल के टुकड़े गिरने से एक व्यक्ति घायल हुआ। संयुक्त अरब अमीरात ने पुष्टि की है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ईरान से आए मिसाइल और ड्रोन हमलों को लगातार नाकाम कर रहे हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश के कई हिस्सों में सुनी गई तेज आवाजें दरअसल इंटरसेप्शन ऑपरेशन का नतीजा थीं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनसीईएमए) ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है, जबकि दुबई प्रशासन ने भी स्पष्ट किया कि शहर में सुनाई दी आवाजें सफल एयर डिफेंस कार्रवाई का परिणाम थीं।

US public opinion

बहरीन में सायरन बजाकर लोगों को अलर्ट किया गया है, वहीं कुवैत की सेना ने भी मिसाइल और ड्रोन हमलों को विफल करने की पुष्टि की है। उधर, लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजरायल के हवाई हमले तेज होने से पूरे पश्चिम एशिया में हालात और विस्फोटक हो गए हैं।

क्या है 'बंकर बस्टर'?

अमेरिका ने इस हमले में जिस हथियार का इस्तेमाल किया, वह है जीबीयू-72 एडवांस 5 के पेनिट्रेटर एक ऐसा बम, जो दुश्मन के सबसे सुरक्षित और गहराई में छिपे ठिकानों को भी निशाना बना सकता है। करीब पांच हजार पाउंड वजनी यह बम पुराने जीबीयू-28 का उन्नत संस्करण है।

इसकी खासियत यह है कि यह सतह पर विस्फोट नहीं करता, बल्कि पहले कंक्रीट और जमीन की परतों को चीरते हुए अंदर तक पहुंचता है और फिर भीतर ही विस्फोट करता है। यही वजह है कि बंकर, सुरंग और भूमिगत ठिकाने भी इससे नहीं बच पाते।कैसे करता है कामइसे फाइटर जेट या बाम्बर विमान से ऊंचाई से गिराया जाता है।

Bunker Buster REUTERS

भारी वजन और तेज रफ्तार के कारण यह मोटी कंक्रीट को भेद देता है। जैसे ही यह पर्याप्त गहराई तक पहुंचता है, इसका वारहेड फटता है और अंदर छिपी संरचना को पूरी तरह तबाह कर देता है। इस तकनीक का एक बड़ा फायदा यह है कि सतह पर अपेक्षाकृत कम नुकसान होता है, जबकि लक्ष्य पूरी तरह नष्ट हो जाता है।

तकनीक में आगे, मार में और भी घातक

जीबीयू-72 को आधुनिक मॉडलिंग और सिमुलेशन तकनीक से तैयार किया गया है। यानी इसके निर्माण से पहले ही कंप्यूटर पर इसकी पूरी क्षमता का परीक्षण किया गया। इसमें संशोधित टेल किट लगी है, जो इसे सटीक दिशा में ले जाती है। यह तकनीक पहले दो हजार पाउंड के बमों में इस्तेमाल होती थी, जिसे अब पांच हजार पाउंड के इस भारी हथियार के लिए विकसित किया गया है। अमेरिकी वायुसेना के अनुसार, इसकी मारक क्षमता पुराने बंकर बस्टर बमों से कहीं ज्यादा है।

टेस्टिंग में भी साबित हुआ दम

इस बम का पहला परीक्षण 2021 में 35,000 फीट की ऊंचाई से किया गया था। फ्लोरिडा के एग्लिन एयर फोर्स बेस पर इसके हर पहलू रिलीज, उड़ान और विस्फोट को परखा गया। जमीनी परीक्षणों में इसका बड़ा विस्फोट किया गया, जिसे उस क्षेत्र का सबसे बड़ा ओपन-एयर ब्लास्ट माना गया। इससे इसकी ताकत और प्रभाव का सटीक आकलन किया गया।

किससे गिराया जाता है?

जीबीयू-72 को एफ-15ई स्ट्राइक ईगल जैसे फाइटर जेट और बी-1बी जैसे बॉम्बर विमानों से गिराया जा सकता है। इसकी कीमत करीब 2.4 करोड़ रुपये (लगभग 2.88 लाख डालर) है। हालांकि यह अमेरिका के 30,000 पाउंड वजनी जीबीयू-57 से छोटा है, लेकिन सटीकता और प्रभाव के मामले में बेहद कारगर माना जाता है।

BOMBER

यह हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर है। अब लड़ाई केवल आसमान और जमीन तक सीमित नहीं रही, बल्कि जमीन के भीतर छिपे ठिकानों तक पहुंच चुकी है। जीबीयू-72 जैसे बंकर बस्टर बम यह दिखाते हैं कि भविष्य की जंग में कोई भी ठिकाना पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहेगा चाहे वह जमीन के कितने ही भीतर क्यों न हो।