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ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होगा UAE, शेख मोहम्मद बिन जायद ने स्वीकारा न्योता

Published: Wed, 21 Jan 2026 09:35 AM (IST)Updated: Wed, 21 Jan 2026 10:01 AM (IST)

संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' ...और पढ़ें

यह कदम ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना का अहम हिस्सा है। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)

यह कदम ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना का अहम हिस्सा है। (फोटो सोर्स- रॉयटर्स)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के न्योते को स्वीकार कर लिया है। वे 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होंगे। यह बोर्ड गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण और स्थिरता बनाए रखने की देखरेख करेगा।

यूएई विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की है। यह कदम ट्रंप की 20-सूत्रीय शांति योजना का अहम हिस्सा है। इसके तहत गाजा संघर्ष को स्थायी रूप से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह बोर्ड ट्रंप की अध्यक्षता में बनेगा और शुरुआत में गाजा पर फोकस करेगा, लेकिन इसका दायरा इससे आगे भी जा सकता है। कई देशों को इसमें शामिल होने का न्योता दिया गया है। यूएई इस बोर्ड में शामिल होने वाला पहला प्रमुख अरब देश बन गया है।

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बोर्ड में शामिल होने के क्या होंगे मायने?

यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद ने कहा कि यह फैसला ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना को पूरी तरह लागू करने की अहमियत को दिखाता है। उन्होंने जोर दिया कि यह योजना फिलिस्तीनी लोगों के वैध अधिकारों को हासिल करने के लिए बेहद जरूरी है। यूएई ने बोर्ड के मिशन में सक्रिय योगदान देने की बात कही है, ताकि सहयोग, स्थिरता और समृद्धि बढ़े।

यूएई ट्रंप प्रशासन के साथ मजबूत संबंध रखता है। 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में ही अबू धाबी ने 'अब्राहम समझौते' पर हस्ताक्षर किए थे। इससे इजरायल के साथ उसके औपचारिक संबंध बने। यह कदम उस दोस्ती को और मजबूत करता है।

सदस्यता की क्या हैं शर्तें?

बोर्ड को लेकर काफी विवाद है। इसमें शामिल होने के लिए देशों से 1 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान मांगा गया है। चार्टर के अनुसार, सामान्य सदस्यता तीन साल की होती है, लेकिन अगर कोई देश पहले साल में 1 अरब डॉलर से ज्यादा नकद देता है, तो उसे स्थायी सीट मिल सकती है। ट्रंप इस बोर्ड के चेयरमैन रहेंगे और किसी देश की सदस्यता उनकी मंजूरी पर निर्भर करेगी।

कुछ लोग मानते हैं कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र को चुनौती दे सकता है। इसका चार्टर सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि यह वैश्विक संघर्षों पर भी असर डाल सकता है। कई पश्चिमी देशों ने इस पर सतर्कता बरती है।

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बोर्ड ऑफ पीस से क्या फायदा होगा?

ट्रंप की 20-सूत्रीय योजना पिछले साल अक्टूबर में शुरू हुई थी। इसका फेज-1 गाजा में सीजफायर, इजरायली बंधकों की रिहाई और स्थानीय लोगों मदद पर केंद्रित था। अब फेज-2 में गाजा का पुनर्निर्माण, डिमिलिटराइजेशन और ट्रांजिशनल गवर्नेंस शामिल हैं। बोर्ड ऑफ पीस इसी फेज का मुख्य हिस्सा है।

यह योजना गाजा में फिलिस्तीनी तकनीकी प्रशासन स्थापित करने की बात करती है। इसमें अंतरराष्ट्रीय निगरानी होगी। ट्रंप का दावा है कि यह योजना क्षेत्र में स्थायी शांति लाएगी।

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