दुबई, एपी। तेल टैंकर पर ईरान और ब्रिटेन के मध्य तनातनी के बीच ईरान ने ब्रिटिश तेल टैंकर को कब्जे में लेने की कोशिश की है। हथियारों से लैस तीन ईरानी नावों ने खाड़ी जल क्षेत्र(Persian Gulf Area) में बुधवार को ब्रिटेन के एक तेल टैंकर को कब्जे में लेने की कोशिश की, लेकिन रॉयल नेवी के एक युद्धपोत ने ईरान के इन मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया। सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज की खाड़ी(Strait of Hormuz)से गुजर रहे ब्रिटिश हैरिटेज तेल टैंकर को मार्ग बदलने और तेहरान के पास समुद्री क्षेत्र में रुकने का आदेश दिया था।

ईरान की ब्रिटेन को धमकी
इससे पहले बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा था कि ब्रिटेन को हमारा तेल टैंकर पकड़ने का परिणाम भुगतना होगा। ब्रिटिश नौसेना ने पिछली चार जुलाई को जिब्राल्टर द्वीप के पास 330 मीटर लंबे ग्रेस-1 नामक तेल टैंकर को यूरोपीय यूनियन (EU) के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर कच्चा तेल सीरिया ले जाने के संदेह में पकड़ा था। तब से यह टैंकर जिब्राल्टर के तट पर खड़ा है।

रूहानी ने बुधवार को सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक संदेश में कहा, 'तुम (ब्रिटेन) असुरक्षा के सूत्रधार हो और तुम्हें इसका परिणाम भुगतना होगा। अब तुम इतना निराश होगे कि जब तुम्हारा कोई पोत क्षेत्र से गुजरेगा तो तुम्हें इसकी सुरक्षा के लिए अपने फ्रिगेट भेजने होंगे क्योंकि तुम डरे हुए हो। तुम इस तरह का कृत्य क्यों करते हो? इसके बजाय तुम्हें जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की अनुमति देनी चाहिए।'

तेल टैंकर पकड़े जाने के बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने ब्रिटेन के राजदूत रॉब मैकेयर को तलब कर इस घटना पर विरोध दर्ज कराया था और तेल टैंकर छोड़ने की मांग की थी। साथ ही यह आरोप भी लगाया था कि अमेरिका के कहने पर तेल टैंकर को पकड़ा गया।

Posted By: Shashank Pandey