सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल आपूर्ति शुरू, 90 डॉलर प्रति बैरल पर आया क्रूड
सऊदी अरब ने हूती हमले में क्षतिग्रस्त हुई ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन से तेल आपूर्ति फिर से शुरू कर दी है, ...और पढ़ें

सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल आपूर्ति शुरू। (रॉयटर्स)
HighLights
सऊदी अरब ने ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन से आपूर्ति फिर शुरू की।
कच्चे तेल की कीमत गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंची।
यानबू बंदरगाह से लाल सागर के रास्ते तेल निर्यात की संभावना बढ़ी।
डिजिटल डेस्क, रियाद। सऊदी अरब ने मंगलवार को ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन के जरिये तेल की आपूर्ति फिर से शुरू कर दी। सऊदी अरब की यह मुख्य पाइपलाइन पिछले हफ्ते हूती लड़ाकों के हमले में क्षतिग्रस्त हो गई थी और तेल की आपूर्ति रुक गई थी। इस पाइपलाइन के चालू होने का असर विश्व बाजार में तेल की कीमत पर नजर आया।
मंगलवार को कच्चे तेल की कीमत कम होकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है। इस बीच हूती और यमन की सरकारी सेना के बीच जमीनी लड़ाई जारी है। इस लड़ाई में सऊदी अरब हवाई हमलों के जरिये यमन की सेना का साथ दे रहा है।
लड़ाई में ब्रिटेन ने सऊदी अरब को रक्षात्मक सैन्य मदद देने का निर्णय लिया है। इस मदद में ब्रिटिश टैंकर विमान आकाश में ही सऊदी लड़ाकू विमानों में ईंधन भरेंगे।
यानबू बंदरगाह से लाल सागर के जरिये तेल निर्यात की संभावना बढ़ी
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल आपूर्ति शुरू होने के बाद अब यानबू बंदरगाह से लाल सागर के जरिये तेल निर्यात की संभावना बढ़ गई है लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह निर्यात तभी सुचारु हो पाएगा जब इस जलमार्ग को कब्जे में ले चुके हूती लड़ाके अनुमति देंगे। वैसे सऊदी अरब यानबू से अपने निर्यात के लिए मिस्र के जरिये वैकल्पिक मार्ग भी अपना सकता है।
फरवरी में अमेरिका-ईरान युद्ध छिड़ने के बाद होर्मुज स्ट्रेट से ऑयल टैंकरों का रास्ता रुक गया था। इसके बाद सऊदी अरब ने यानबू से लाल सागर के रास्ते निर्यात बढ़ाकर तेल बाजार को संतुलित रखने की कोशिश की थी।
सऊदी अरब से तेल लेकर जाने वाले टैंकरों के लाल सागर से गुजरने पर हूती के 20 जुलाई को रोक लगाने से पहले तक यानबू से करीब 40 लाख बैरल तेल का निर्यात हो रहा था।
हूती ने पहले लाल सागर से सऊदी अरब के जहाजों-टैंकरों का आवागमन बंद किया। इसके बाद यानबू के बंदरगाह और वहां स्थित ऑयल टर्मिनल पर हमला कर उसे नुकसान पहुंचाया था लेकिन हाल के दिनों में मरम्मत कर उसे भी फिर से काम लायक बना लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, चीन जाने वाले टैंकर में यानबू से तेल भरने का कार्य शुरू हो गया है। चूंकि चीन को ईरान का करीबी माना जाता है, इसलिए वहां जा रहे ऑयल टैंकर को हूती बेरोकटोक जाने दे सकते हैं।
बताया जाता है कि सऊदी अरब मिस्र के भूमध्य सागर के तट पर स्थित सैद बंदरगाह के जरिये भी अपना तेल निर्यात कर सकता है। वहां पर सऊदी अरब अपने टैंकर से अन्य देश के टैंकर में तेल स्थानांतरित कर उसे निर्यात कर सकता है।
(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
