मक्का की लाल रेखा से 'आंसुओं के द्वार' तक: अमेरिका-ईरान युद्ध किस तरह एमबीएस के करीब पहुंच रहा?
सऊदी अरब की वायु रक्षा ने मक्का के दक्षिण में एक हूथी ड्रोन को मार गिराया। सऊदी सेना ने पवित्र ...और पढ़ें

मक्का की लाल रेखा से 'आंसुओं के द्वार' तक। (रॉयटर्स)
HighLights
सऊदी एयर डिफेंस ने हूथी ड्रोन को मार गिराया।
ड्रोन मक्का के दक्षिण में नष्ट किया गया।
सऊदी ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा को रेड लाइन बताया।
डिजिटल डेस्क, रियाद। सऊदी अरब की एयर डिफेंस ने मक्का के ठीन दक्षिण में एक हूती ड्रोन को मार गिराया। सऊदी सेना के प्रवक्ता तुर्की अल-माल्की ने पवित्र स्थलों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को रेड लाइन बताया और हूथियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
हालांकि, हूती प्रवक्ता हजेम अल-असद ने इसे खारिज करते हुए एक्स पर लिखा कि मक्का को निशाना बनाने के दावे एक घिसा-पिटा झूट है, जिनका इस्तेमाल पहले भी किया जा चुका है।
मक्का से क्यों बदल जाते हैं राजनीतिक हालात?
मक्का हज की जगह है और यहां काबा है, जिसकी तरफ दुनिया भर के मुसलमान नमाज पढ़ते हैं। मुस्लिम दुनिया में सऊदी अरब की राजशाही की साख के लिए पवित्र जगहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी बहुत अहम है। मक्का या उसके आस-पास हमला होने पर ऐसे नतीजे हो सकते हैं जिन्हें सिर्फ सैन्य और आर्थिक हिसाब-किताब से आसानी से नहीं संभाला जा सकता ।
रियाद के लिए यह एक बहुत मुश्किल इम्तिहान है। उसे यह साबित करना होगा कि वह इन जगहों की सुरक्षा कर सकता है और साथ ही ऐसी स्थिति से भी बच सकता है जिससे और ज्यादा खतरा पैदा हो। गलती से हुआ हमला भी लोगों में बदले की भावना और गुस्सा पैदा कर सकता है।
इससे कूटनीतिक मामले भी और उलझ सकते हैं। जो सरकारें लड़ाई से दूर रहने की कोशिश कर रही हैं, उन पर पवित्र जगहों की सुरक्षा में मदद करने का दबाव बन सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अपने-आप कोई सैन्य गठबंधन बन जाएगा।
मक्का पर खतरे की निंदा करना और हूतियों के खिलाफ लड़ने के लिए सेना भेजना, ये दोनों बहुत अलग-अलग फेसले हैं।
भारत ने भी जताई चिंता
भारत के लिए चिंता सिर्फ तेल की कीमतों तक ही सीमित नहीं होगी, बल्कि इसमें तीर्थयात्री, सऊदी अरब में रहने वाले भारतीय नागरिक और खाड़ी क्षेत्र के एक बड़े सहयोगी देश के साथ संबंध भी शामिल होंगे।
'गेट ऑफ टीयर्स' पर बढ़ रहा दबाव
बाब-अल-मंदेब, जिसे ‘गेट ऑफ टीयर्स’ भी कहा जाता है, लाल सागर को अदन की खाड़ी और बड़े हिंद महासागर से जोड़ता है। यूरोप और एशिया के बीच स्वेज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए यह एक जरूरी रास्ता है।
हूती लड़ाकों ने यमन के तट पर मोखा और धबाब पर कब्जा कर लिया है और पेरिम द्वीप पर भी अधिकार कर लिया है, जो इस जलडमरूमध्य को दो शिपिंग चैनलों में बांटता है। इन कब्जों से जहाजों को धमकाने की उनकी क्षमता और मजबूत हो जाती है।
