दोहा (कतर), एएनआइ। तालिबान पर अंकुश लगाने और देश में शांति के माहौल को लेकर अमेरिका, रूस, चीन और पाकिस्तान सहित ट्रोइका प्लस के प्रतिनिधियों ने अगले महीने दोहा में एक बैठक आयोजित करने की योजना बनाई है। बता दें ​ट्रोइका प्लस उन देशों का समूह हैं, जो तालिबान पर अंकुश लगाने के लिए साथ में काम कर रहे हैं, जिसमें की अमेरिका, रूस और चीन जैसे देश शामिल है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अफगानिस्तान में रूसी दूत ज़मीर काबुलोव का हवाला देते हुए लिखा है कि इस समय पहला लक्ष्य अफगान समझौता कर देश में युध्द पर विराम लगाना, अफगान के साथ फिर से बातचीत शुरू करना, देश में आम चुनाव करवाना और संवैधानिक सुधार कर के एक अंतरिम गठबंधन सरकार बनाना हैं। ​अफगानिस्तान सरकार को तालिबान से एक साल पहले बातचीत की शुरुआत करनी चाहिए थी जब आंदोलन को सैन्य सफलता नहीं मिली थी।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार ज़मीर काबुलोव ने यह भी चिंता जताई है कि देश से खदेड़े गए अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन देश में खुद को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं। जब रूसी दूत ज़मीर काबुलोव से यह पुछा गया कि किस देश का प्रभाव अफगानिस्तान में सबसे अधिक है, इस पर उन्होंने कहा कि किसी भी देश का नहीं है।

कुछ दिन पहले ही अफगान सरकार और तालिबान दोनों ने देश में शांति बहाल करने और युद्ध को रोकने के लिए उच्च स्तरीय वार्ता जारी रखने के प्रयासों में तेजी लाने के लिए सहमत हुए थे। दोहा में हुए दो दिवसीय बैठक के बाद दोनों पक्षों ने एक संयुक्त बयान जारी किया क्योंकि अफगानिस्तान में हिंसा भड़की थी। मगर दोनों पक्षों ने हिंसा या संघर्ष विराम को कम करने की बात नहीं की।

नेशनल सुलह के लिए उच्च परिषद के अध्यक्ष और तालिबान के साथ बातचीत में अफगान राजनेताओं के 7 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख अब्दुल्ला अब्दुल्ला ने कहा कि इन दो दिनों की बैठक से यह स्पष्ट हो गया कि दोनों पक्षों की स्थिति क्या है। तालिबान ने इस समय अफगानिस्तान के आधे से अधिक क्षेत्र पर नियंत्रण कर लिया हैं, तो वहीं अफगान बलों ने आतंकवादियों को विफल करने के लिए एक जवाबी कार्रवाई शुरू की है।

Edited By: Avinash Rai