यरूशलम, प्रेट्र। वर्ष 1980 के आसपास जब पाकिस्तान चोरीछुपे परमाणु हथियार के विकास का प्रयास कर रहा था, तब इजरायल समेत दुनिया के कई देश इसके खतरे को भांप चुके थे। संदेह है कि इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने परमाणु हथियार कार्यक्रम में पाकिस्तान की मददगार जर्मन व स्विस कंपनियों को धमकाने के साथ-साथ उन पर हमले भी करवाए थे। यहूदी देश को डर था कि पाकिस्तान के परमाणु संपन्न होने से उसके अस्तित्व को खतरा पैदा हो सकता है।

यरूशलम पोस्ट ने मंगलवार को इस आशय की एक रिपोर्ट छापी है, जिसमें उसने एक प्रमुख स्विस दैनिक की खबर का हवाला दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने ऐसी कंपनियों की गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया था, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली। इसके बाद कोरा इंजीनियरिंग के प्रमुख कर्ताधर्ता, वालिसमिलर की फैक्ट्री व हेंज मेबस के दफ्तर पर फरवरी, मई व नवंबर 1981 में हमले हुए थे। इससे उन संदेहों को बल मिला कि मोसाद ने हमलों को अंजाम दिया और उन्हें धमकाया।

स्विस दैनिक न्यू जर्चर जीतुंग (एनजेडजेड) ने रविवार को रिपोर्ट दी कि पाकिस्तान के परमाणु बम से लैस इस्लामिक राज्य बनने की आशंका से इजराइल सतर्क हो गया था। पाकिस्तान व ईरान ने 1980 के आसपास परमाणु हथियार विकसित करने के लिए साथ मिलकर काम किया था। जर्मन व स्विस कंपनियों ने उनकी मदद की थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बर्न व वाशिंगटन के अभिलेखागारों के दस्तावेजों से तस्वीर साफ होती है। स्विस इतिहासकार एड्रियन हैनी के हवाले से कहा गया है कि मोसाद, स्विस व जर्मन कंपनियों पर हुए बम हमलों में शामिल था। हालांकि, यह साबित करने के लिए कोई ठोस सुबूत नहीं है कि मोसाद ने उन हमलों को अंजाम दिया था। बता दें कि स्विट्जरलैंड व जर्मनी में हुए धमाकों की जिम्मेदारी दक्षिण एशिया में परमाणु अप्रसार के लिए काम करने वाले एक संगठन ने ली थी।

विवादित विज्ञानी अब्दुल कादिर खान का भी जिक्र 

एनजेडजेड ने अपनी रिपोर्ट में पाकिस्तान के विवादित परमाणु विज्ञानी अब्दुल कादिर खान की भूमिका का भी उल्लेख किया है, जिन्होंने वर्ष 1980 के आसपास प्रौद्योगिकी व पश्चिमी देशों के प्रतिष्ठानों का ब्लूप्रिंट हासिल करने के लिए यूरोप के चक्कर लगाए थे। खान ने स्विट्जरलैंड में दो जर्मन इंजीनियरों ने मुलाकात की भी की थी।

पाकिस्तान ने वर्ष 1998 में दो बार किए थे परमाणु परीक्षण 

पाकिस्तान ने 28 मई, 1998 को बलूचिस्तान प्रांत में एकसाथ पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए थे। यह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों का पहला सार्वजनिक परीक्षण था। इसके बाद उसी साल 30 मई को दूसरा परमाणु परीक्षण किया गया।

Edited By: Dhyanendra Singh Chauhan