शहबाज शरीफ के दावों की खुली पोल, अमेरिका ने लेबनान में युद्धविराम के पाकिस्तानी दावे को नकारा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मात्र एक दिन पहले इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर दावा किया था कि हालिया ...और पढ़ें

पश्चिम एशिया में युद्धविराम कराने की पाकिस्तान के दावे की खुलने लगी पोल (फोटो- रॉयटर)
HighLights
पश्चिम एशिया में युद्धविराम कराने की पाकिस्तान के दावे की खुलने लगी पोल
युद्धविराम में लेबनान के शामिल होने के शहबाज शरीफ के दावे को अमेरिका ने सिरे से किया खारिज
होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर भी ईरान और अमेरिका के बीच मतभेद
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के मौजूदा तनावपूर्ण माहौल में पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम को लेकर किए जा रहे दावों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मात्र एक दिन पहले इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म 'एक्स' पर दावा किया था कि हालिया युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है। लेकिन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।
वेंस ने बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में साफ कहा, 'मुझे लगता है कि यह एक गलतफहमी से उपजा है। ईरानियों ने सोचा कि युद्धविराम में लेबनान शामिल है, लेकिन ऐसा नहीं था। हमने कभी ऐसा वादा नहीं किया था।'
शरीफ के दावे और अमेरिकी बयान के बीच इस स्पष्ट विरोधाभास ने पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका पर सवालिया निशान लगा दिया है। इसके बावजूद शुक्रवार को इस्लामाबाद में युद्धविराम पर आगे की वार्ता को लेकर तैयारियां चल रही हैं। माना जा रहा है कि यह बैठक ही तय करेगी कि पश्चिम एशिया में अस्थायी या स्थायी शांति स्थापित हो पाती है या नहीं।
पाकिस्तान सरकार ने पिछले हफ्तों में बार-बार यह प्रचारित किया था कि इस्लामाबाद की मध्यस्थता से पश्चिम एशिया में युद्धविराम संभव हुआ है और लेबनान सहित पूरे क्षेत्र को इसका लाभ मिलेगा।
अब वेंस के बयान से साफ है कि लेबनान कभी भी किसी औपचारिक युद्धविराम समझौते का हिस्सा नहीं रहा। यह विवाद उस व्यापक संदर्भ में आया है जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच गहरे मतभेद बने हुए हैं।
क्षेत्रीय तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण इस जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के रुख में कोई आम सहमति नहीं बन पाई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर भी अपनी 'सक्रिय भूमिका' का दावा किया था, लेकिन वास्तविक बातचीत अमेरिका और ईरान के बीच ही हो रही है।यह पहली बार नहीं है जब क्षेत्रीय शांति के पाकिस्तान के दावों को प्रमुख शक्तियों ने खारिज किया हो।
गाजा संघर्ष के दौरान पाकिस्तान ने इस्लामिक देशों के संगठन ओआइसी के मंच से लगातार 'युद्धविराम कराने' की अपनी भूमिका पर जोर दिया था, लेकिन वाशिंगटन व अन्य यूरोपीय देशों ने इसे कभी औपचारिक मान्यता नहीं दी।
इसी तरह यमन में हाउती विद्रोहियों के मुद्दे पर पाकिस्तानी अधिकारियों ने शांति प्रयासों का जिक्र किया, पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब-ईरान समन्वय या अमेरिकी कूटनीति को ही निर्णायक माना गया।
कूटनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान घरेलू राजनीति और मुस्लिम दुनिया में अपनी छवि मजबूत करने के लिए ऐसे बयान जारी करता रहा है, लेकिन वास्तविकता में पश्चिम एशिया के शांति प्रयासों में निर्णायक भूमिका अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और इजराइल जैसे प्रमुख खिलाड़ियों के हाथ में ही रही है। वेंस का बयान स्पष्ट संकेत देता है कि वाशिंगटन पाकिस्तान के दावों को सही नहीं मानता।
शहबाज शरीफ के लेबनान वाले दावे पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया का भी ध्यान गया है। इसके कुछ घंटे पहले शहबाज शरीफ की तरफ से 'एक्स' पर लिखे पोस्ट को लेकर भी चर्चा गर्म है कि इसका ड्राफ्ट अमेरिका से आया था। 'द न्यूयार्क टाइम्स' ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि शहबाज शरीफ की पोस्ट को पहले व्हाइट हाउस ने देखा था और मंजूरी दी थी।
मध्यस्थ नहीं, केवल संदेशवाहक है पाकिस्तान : रिपोर्ट
पश्चिम एशिया में युद्धविराम कराने का श्रेय ले रहे पाकिस्तान के दावे की पोल ब्रिटिश अखबार 'फाइनेंशियल टाइम्स' ने भी खोली है। अखबार ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि पाकिस्तान कोई तटस्थ मध्यस्थ नहीं, बल्कि अस्थायी युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका का एक संदेशवाहक था।
रिपोर्ट के अनुसार, संवेदनशील 'बैक-चैनल' कूटनीति के तहत ट्रंप प्रशासन ने कई हफ्तों तक पाकिस्तान पर दबाव डाला ताकि वह ईरान को होर्मुज खोलने और युद्धविराम स्वीकार करने के लिए राजी करे।
मुस्लिम-बहुल पड़ोसी के तौर पर पाकिस्तान की स्थिति को अमेरिका समर्थित प्रस्ताव को ईरान के लिए अधिक स्वीकार्य बनाने में एक अहम कारक माना गया।
इसके लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया। जैसे-जैसे समयसीमा नजदीक आती गई, मुनीर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ फोन पर बातचीत की, जबकि पाकिस्तान के अधिकारी वाशिंगटन व तेहरान के बीच प्रस्तावों का आदान-प्रदान करते रहे।
पाकिस्तान ने अमेरिका द्वारा तैयार 15-सूत्रीय योजना को आगे बढ़ाया
पाकिस्तान ने अमेरिका द्वारा तैयार 15-सूत्रीय योजना को आगे बढ़ाया और ईरान की प्रतिक्रिया अमेरिका तक पहुंचाई, इसमें पांच और 10-सूत्रीय जवाबी प्रस्ताव शामिल थे। राजनयिकों ने बताया कि ईरान धीरे-धीरे अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ पहलुओं को सीमित करने पर अधिक सहमत होता गया।
