परमाणु हथियार से लेकर मुस्लिम ब्रदरहुड तक... पाकिस्तान को लेकर इजरायल के पूर्व PM ने किस 'खतरे' के दिए संकेत
इज़रायल के पूर्व पीएम नफ़्ताली बेनेट ने तुर्किये, कतर, मुस्लिम ब्रदरहुड और परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान के एक नए गठबंधन पर चिंता जताई है।
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सऊदी-पाक डिफेंस पैक्ट और तुर्की की भूमिका पर इजरायल की नजर (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नेफ्टली बेनेट ने यरूशलम में एक अहम सम्मेलन के दौरान क्षेत्र में बन रहे नए गठजोड़ को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि तुर्किये, कतर, मुस्लिम ब्रदरहुड और परमाणु शक्ति संपन्न पाकिस्तान एक ऐसी धुरी बना रहे हैं जो इजरायल के खिलाफ माहौल तैयार कर सकती है।
बेनेट ने कहा कि यह गठजोड़ सऊदी अरब को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन को 'खतरनाक प्रतिद्वंद्वी' बताते हुए कहा कि तुर्किये इजरायल के लिए नया खतरा बनता जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि सरकार को इन संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बेनेट के मुताबिक, एक 'शत्रुतापूर्ण धुरी' तैयार हो रही है, जिसमें पाकिस्तान की परमाणु क्षमता भी अहम मानी जा रही है।
तुर्किये और पाकिस्तान पर चिंता
बेनेट ने कहा कि जिस तरह इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खतरा मानता है, उसी तरह पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर भी इसराइल में चिंता है। उनका कहना था कि तुर्किये की भूमिका अब पहले से ज्यादा आक्रामक दिख रही है और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।
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दरअसल, पिछले साल सितंबर में सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच एक रक्षा समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार, किसी एक देश पर हमला दोनों पर हमला माना जाएगा। इसकी तुलना नाटो के अनुच्छेद-5 से की जा रही है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि इस गठजोड़ में तुर्किये के शामिल होने की संभावना पर चर्चा हो रही है। पाकिस्तान इस्लामिक दुनिया का एकमात्र परमाणु संपन्न देश है, जिससे उसकी रणनीतिक अहमियत बढ़ जाती है।
क्या यह गठजोड़ इजरायल के खिलाफ है?
यरूशलम पोस्ट में छपे एक लेख में थिंक टैंक के शोधकर्ता योएल गुजांस्की ने लिखा था कि सऊदी-पाक रक्षा समझौते को सीधे इजरायल विरोधी कदम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, समझौते में परमाणु हथियारों का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान आधिकारिक तौर पर मानता है कि उसके परमाणु हथियार भारत के लिए हैं, न कि किसी क्षेत्रीय सुरक्षा छतरी के रूप में। हालांकि, सऊदी अरब द्वारा पाकिस्तान को वित्तीय मदद दिए जाने से न्यूक्लियर अंब्रेला की अटकलें लगती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब का यह कदम अमेरिका की घटती विश्वसनीयता, ईरान की आक्रामकता और क्षेत्रीय अस्थिरता से जुड़ा हो सकता है।
पाकिस्तान और इजरायल के संबंध
पाकिस्तान ने अब तक इजरायल को देश के रूप में मान्यता नहीं दी है। दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। पाकिस्तान में इजरायल के खिलाफ अक्सर विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं। 2020 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि जब तक फलस्तीनियों को उनका अधिकार नहीं मिलता, पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा।
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हालांकि, 2005 में पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी और इजरायल के विदेश मंत्री सिलवान शालोम की इस्तांबुल में मुलाकात हुई थी। बाद में 2018 में इजरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा था कि इजरायल पाकिस्तान का दुश्मन नहीं है और पाकिस्तान को भी ऐसा नहीं समझना चाहिए।
