वाशिंगटन, एएफपी। सऊदी पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के मामले में कथित तौर पर दो शाही सलाहकारों के नाम सामने आए हैं। लेकिन सऊदी अरब में चल रही इस मामले की सुनवाई से एक शाही सलाहकार की गैरमौजूदगी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभियोजन पक्ष का कहना है कि देश के खुफिया विभाग के उप प्रमुख अहमद अल-असीरी के नेतृत्व में इस अपराध को अंजाम दिया गया। शाही अदालत के मीडिया सलाहकार सऊद अल-कातनी ने उनकी मदद की थी।

ये दोनों ही सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के करीबियों में शामिल थे। खशोगी की हत्या का मामला सामने आने पर दोनों को बर्खास्त कर दिया गया था। लेकिन मुकदमा सिर्फ असीरी पर चल रहा है। वह जनवरी के बाद से हुई कोर्ट की पांच कार्यवाही में उपस्थित भी रहे थे। दूसरी ओर, कातनी एक भी सुनवाई में नहीं दिखे। कुछ लोगों का मानना है कि या तो सऊदी सरकार उन्हें बचाना चाहती है या उन पर अलग से मुकदमा चलाएगी।

वाशिंगटन पोस्ट के पत्रकार और सऊदी सरकार खासकर क्राउन प्रिंस के आलोचक खशोगी की हत्या के मामले में गत नवंबर में 11 अज्ञात संदिग्धों पर आरोप तय किए गए थे। इनमें से पांच को फांसी की सजा हो सकती है। बीते साल अक्टूबर में इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में खशोगी की हत्या कर दी गई थी। अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआइए का कहना है कि सऊदी प्रिंस के आदेश पर इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया था। सऊदी सरकार इस आरोप को खारिज करती रही है। उसके अनुसार, खशोगी की हत्या कुछ अपराधियों ने की है।

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